कांगड़ा की बोह घाटी में बादल फटने से तबाही, CM ने प्रभावित परिवारों से फोन पर बातचीत की

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By Hills Post

शिमला: कांगड़ा जिला की बोह घाटी में अचानक बादल फटने से हुए भारी नुकसान के बाद राज्य सरकार पूरी तरह से हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज राजधानी शिमला से कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा तथा आपदा प्रभावित स्थानीय परिवारों से फोन पर सीधे बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया और नुकसान की विस्तृत जानकारी हासिल की।

घटना की सूचना मिलते ही कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा स्वयं ग्राउंड जीरो यानी घटना स्थल पर पहुंच चुके हैं और वहां राहत, बचाव एवं पुनर्वास कार्यों की कमान संभालकर सीधे निगरानी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने फोन पर उपायुक्त से बोह घाटी में बादल फटने के कारण हुई संपत्ति के नुकसान, स्थानीय लोगों की सुरक्षा व्यवस्था, प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली व पानी जैसी आवश्यक सेवाओं की तुरंत बहाली तथा जिला प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए कि आपदा से प्रभावित हुए प्रत्येक परिवार को बिना किसी विलंब के तुरंत खाद्य सामग्री, तिरपाल, तात्कालिक वित्तीय मदद और हरसंभव राहत सामग्री उपलब्ध करवाई जाए। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार प्रभावितों के साथ मजबूती से खड़ी है।

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि वे स्वयं स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने के लिए बहुत जल्द बोह घाटी का दौरा करेंगे और नुकसान का प्रशासनिक आकलन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट आश्वासन दिया कि जिन भी परिवारों के मकान इस भीषण प्राकृतिक आपदा में आंशिक या पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्रदेश सरकार के आपदा राहत नियमों के तहत विशेष सहायता राशि प्रदान की जाएगी ताकि वे अपने आशियाने को फिर से बना सकें।

मौसम विभाग (IMD) द्वारा प्रदेश में आगामी दिनों के लिए जारी भारी बारिश की चेतावनी के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने बोह घाटी और आसपास के संवेदनशील इलाकों के लोगों से सतर्क व सुरक्षित रहने की भावुक अपील की है। उन्होंने लोगों से नदी-नालों से दूर रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया।

दूसरी ओर, उपायुक्त हेमराज बैरवा ने मुख्यमंत्री को जमीनी स्थिति की पल-पल की जानकारी देते हुए आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय पुलिस टीम के साथ मिलकर प्रभावितों की सुरक्षा व सहायता के लिए चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी से डटा हुआ है।

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