सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के मृदा विज्ञान एवं जल प्रबंधन विभाग में डॉ. राजेश कौशल ने नए विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। व्यापक शैक्षणिक और शोध अनुभव रखने वाले डॉ. कौशल मृदा उर्वरता और पादप पोषण के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं।

डॉ. कौशल का मुख्य शोध कार्य मृदा सूक्ष्मजीव विज्ञान (Soil Microbiology) और पर्यावरण विज्ञान पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कृषि अपशिष्टों से समृद्ध कम्पोस्ट और वर्मी-कम्पोस्ट तैयार करने के साथ-साथ सूक्ष्मजीव आधारित तकनीकें विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मार्गदर्शन में अब तक 38 स्नातकोत्तर और 18 पीएचडी शोधार्थी अपनी डिग्री पूरी कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, उनके 100 से अधिक शोध पत्र और 17 पुस्तक अध्याय प्रकाशित हो चुके हैं।
डॉ. कौशल को फलों, सब्जियों और फूलों की फसलों के लिए पाँच विशेष पोषक तत्व प्रबंधन (INM) तकनीकें विकसित करने का श्रेय जाता है। ये तकनीकें स्थानीय ‘प्लांट ग्रोथ प्रमोटिंग राइजोबैक्टीरिया’ (PGPR) पर आधारित हैं। इनमें से दो तकनीकों को राष्ट्रीय स्तर और तीन को राज्य स्तर पर किसानों और बागवानों द्वारा सफलतापूर्वक अपनाया जा चुका है।
पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. कौशल ने अपनी भविष्य की प्राथमिकताओं को साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और खेती में बाहरी रसायनों पर निर्भरता को कम करना होगा। उन्होंने मिट्टी में लंबे समय तक कार्बन संचयन के लिए ‘बायोचार’ की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया।
डॉ. कौशल ने किसानों और बागवानों को आश्वस्त किया कि विभाग मृदा एवं पत्ती विश्लेषण से संबंधित उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं और विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराने के लिए सदैव तत्पर रहेगा, ताकि प्रदेश में उत्पादक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिल सके।