नाहन : सिरमौर रियासत की नींव से जुड़ा चार सदियों से भी पुराना एक गौरवशाली अध्याय रविवार को उस समय फिर जीवंत हो उठा, जब राजपरिवार के वर्तमान मुखिया लक्ष्यराज प्रकाश बाबा बनवारी दास की समाधि पर नमन करने पहुंचे। एक लंबे अरसे के बाद राजपरिवार के किसी शीर्ष सदस्य का इस सिद्ध स्थल पर आना क्षेत्र में गहरी चर्चा और कौतूहल का विषय बना हुआ है।
ऐतिहासिक साक्ष्यों और जनश्रुतियों के अनुसार, बाबा बनवारी दास का नाम नाहन नगर की स्थापना के मूल स्तंभों में गिना जाता है। साल 1621 में जब तत्कालीन शासक राजा कर्म प्रकाश अपनी नई राजधानी के लिए उपयुक्त स्थान की खोज में भटक रहे थे, तब इस महान संत ने नगर बसाने के लिए अपनी तपोभूमि सहर्ष सौंप दी थी। इसी पावन स्थल पर आगे चलकर सिरमौर रियासत का यह खूबसूरत मुख्यालय फल-फूल सका।

वक्त के थपेड़ों और शहर के आधुनिक विस्तार के बीच, नाहन को अपनी गोद देने वाले इस संत की स्मृतियां धीरे-धीरे लोक-चेतना से ओझल होने लगी थीं। वर्षों से यह पवित्र समाधि स्थल केवल कुछ ही अनुयायियों तक सीमित रह गया था। लेकिन लक्ष्यराज प्रकाश की इस हालिया यात्रा ने एक बार फिर इस भूली-बिसरी धरोहर को मुख्यधारा की चर्चा में ला खड़ा किया है।
समाधि स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए लक्ष्यराज प्रकाश ने नाहन के इतिहास की इस सबसे महत्वपूर्ण कड़ी को सम्मान दिया। इतिहास और संस्कृति के जानकारों का मानना है कि इस यात्रा को महज एक औपचारिक या धार्मिक दौरा नहीं माना जाना चाहिए; बल्कि यह अपनी जड़ों को तलाशने और शहर के सांस्कृतिक वजूद को सहेजने की एक गंभीर पहल है।
इस घटनाक्रम के बाद अब स्थानीय निवासियों में एक नई उम्मीद जगी है। लोग आस लगाए बैठे हैं कि आने वाले दिनों में इस ऐतिहासिक स्थल के जीर्णोद्धार और इसे एक प्रमुख पहचान दिलाने के लिए ठोस प्रयास होंगे, ताकि भविष्य की पीढ़ियां भी नाहन के उदय की इस अनमोल गाथा से रूबरू हो सकें।