नाहन : इंटरनेट पर सर्च इंजन से अस्पताल का नंबर निकालना नाहन के एक बुजुर्ग सेवानिवृत्त शिक्षक को बेहद भारी पड़ गया। शातिरों ने बुकिंग के बहाने उनके बैंक खाते से करीब 66 हजार रुपये उड़ा लिए। हालांकि, पीड़ित और उनके बेटे की त्वरित सूझबूझ और साइबर सेल की सक्रियता के चलते ठगी गई राशि में से 19,000 रुपये वापस ब्लॉक करवा कर पीड़ित को दिला दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, नाहन के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक मदन लाल (बदला हुआ नाम) को अपने इलाज के सिलसिले में चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में एमआरआई करवानी थी। इसी दौरान उन्हें किसी परिचित ने सलाह दी कि अस्पताल में ऑनलाइन बुकिंग नंबर के जरिए एडवांस अपॉइंटमेंट मिल जाती है।

मदन लाल ने इंटरनेट (गूगल) पर अस्पताल का नंबर सर्च किया और वहां मिले एक नंबर पर कॉल कर दी। फोन उठाने वाले शातिर ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताया और एमआरआई स्लॉट बुक करने के नाम पर केवल 5 रुपये का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करने को कहा। बुजुर्ग शातिरों की इस चाल को समझ नहीं पाए और उन्होंने बताए गए तरीके से भुगतान कर दिया। शातिरों ने इसी दौरान उनके खाते और फोन का एक्सेस हासिल कर लिया।
इस घटना के अगले दिन, जब मदन लाल अपने बेटे अजय (बदला हुआ नाम) के साथ कार से चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए, तो रास्ते में एक पेट्रोल पंप पर गाड़ी में तेल डलवाने के बाद उन्होंने ऑनलाइन भुगतान करने का प्रयास किया। मोबाइल ऐप चेक करते ही उनके होश उड़ गए। खाते में मौजूद करीब 66,000 रुपये गायब थे और खाता पूरी तरह खाली हो चुका था।
बैंक से संपर्क करने पर पता चला कि उनके खाते से शातिरों ने चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन (19000, 15000 और अन्य) कर पूरी रकम निकाल ली थी। खाता खाली होने की बात सामने आते ही अजय ने बिना एक पल गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करवाई। समय रहते शिकायत दर्ज होने के कारण नेशनल साइबर क्राइम की टीम ने तुरंत एक्शन लिया। इसके साथ ही नाहन की स्थानीय साइबर सेल टीम ने भी मामले में पूरा सहयोग किया।
साइबर टीमों की मुस्तैदी का ही नतीजा रहा कि शातिरों द्वारा ट्रांसफर की गई रकम में से 19,000 रुपये की ट्रांजैक्शन को बीच में ही फ्रीज (ट्रेस) कर दिया गया, जिससे यह राशि पीड़ित बुजुर्ग को वापस मिल गई। शेष राशि को रिकवर करने और आरोपियों तक पहुंचने के लिए साइबर पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
साइबर सेल की अपील:
इंटरनेट पर मौजूद किसी भी रैंडम नंबर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी अस्पताल या सरकारी सेवा का नंबर हमेशा उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही लें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में कोई ऐप डाउनलोड न करें और न ही कोई संदिग्ध लिंक खोलें। यदि ठगी हो जाती है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें, शुरुआती घंटों में की गई शिकायत से पैसे वापस मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।