नाहन: जब शहर समेटता है अपना कारोबार, तब शुरू होता है इन ‘अदृश्य नायकों’ का मिशन

नाहन : जब घड़ी की सुइयां रात के 9 बजाती हैं और शहर गहरी नींद की आगोश में जाने की तैयारी कर रहा होता है, तब नाहनके बाज़ारों में एक अलग ही हलचल शुरू होती है। यह हलचल है उन ‘स्वच्छता दूतों’ की, जिनके लिए न मौसम की मार मायने रखती है और न ही समय की पाबंदी। बारिश हो, हाड़ कंपाने वाली ठंड हो या धूल भरी आंधी नाहन के बाजार में सफाई कर्मचारी अपनी डयूटी पर डटे मिलते हैं।

रात के ठीक 9 बजते ही नाहन के मुख्य बाजार में एक जानी-पहचानी आहट सुनाई देने लगती है। यह वक्त है उन सफाई कर्मचारियों के आगमन का, जिनके लिए दिन और रात के मायने हम जैसे आम नागरिकों से बिल्कुल अलग हैं। जब दुकानदार अपनी दुकानों के शटर गिराकर घर की ओर निकलते हैं, तब ये कर्मवीर हाथ में झाड़ू थामे बाजार की सफाई के मोर्चे पर डट जाते हैं। बारिश की रिमझिम हो, आंधी का शोर हो या फिर कड़ाके की ठंड ये चेहरे बाजार में मुस्तैद मिलते हैं।

पूरे दिन की व्यावसायिक गतिविधियों के बाद बाजार में कचरा फैला होता है। जब दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर घरों को लौट जाते हैं, तब ये सफाई कर्मचारी पूरे उत्साह के साथ सफाई अभियान छेड़ देते हैं। सबसे सुखद पहलू यह है कि इतनी कठिन परिस्थितियों और रात के सन्नाटे में भी इन कर्मचारियों के चेहरों पर थकान के बजाय एक मुस्कान और काम के प्रति समर्पण दिखाई देता है। वे आपस में हंसी-मजाक करते हुए पूरे बाजार को चकाचक कर देते हैं, ताकि अगली सुबह जब शहरवासी जागें, तो उन्हें साफ-सुथरी गलियां मिलें।

विडंबना यह है कि जो लोग हमारी गंदगी साफ कर हमें बीमारियों से बचाते हैं, समाज उन्हें वह सम्मान नहीं दे पाता जिसके वे हकदार हैं। अक्सर देखा गया है कि उनके प्रयासों की सराहना करने के बजाय, कुछ लोग उन पर कटाक्ष करने या उनकी मेहनत में कमियां निकालने से बाज नहीं आते। यह एक कड़वा सच है कि हम उनकी मेहनत को ‘अपना अधिकार’ तो समझते हैं, लेकिन उनके प्रति ‘मानवीय सम्मान’ प्रकट करना भूल जाते हैं।

इन कर्मचारियों का काम केवल कचरा उठाना नहीं है, बल्कि शहर की सुंदरता और स्वास्थ्य को बनाए रखना है। यदि ये लोग एक दिन भी अपनी ड्यूटी पर न आएं, तो शहर का दम घुटने लगेगा।

नाहन के इन कर्मवीरों का मुस्कुराता हुआ चेहरा हमें यह सिखाता है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। आवश्यकता इस बात की है कि हम उनके काम का सम्मान करें। अगली बार जब आप रात को इन्हें बाजार में काम करते देखें, तो कटाक्ष करने के बजाय एक बार “धन्यवाद” कहकर देखें—यह उनकी पूरी रात की थकान मिटाने के लिए काफी होगा।

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पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।