नाहन : मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में किए जा रहे बदलावों को लेकर प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। हिमाचल कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार पर मनरेगा के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए इन बदलावों को तत्काल बहाल करने की मांग की है। इसी कड़ी में हिमाचल कांग्रेस कमेटी के सह प्रभारी विदित चौधरी ने नाहन में पत्रकार वार्ता कर आगामी आंदोलन की रूपरेखा साझा की।
विदित चौधरी ने कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की जानी चाहिए, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच ग्रामीण मजदूरों को राहत मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा को डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ने के कारण देशभर में करीब 2 करोड़ मजदूर काम से वंचित हो रहे हैं, जो ग्रामीण रोजगार व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है।

उन्होंने जानकारी दी कि इन मांगों को लेकर 12 जनवरी से प्रदेशभर में दो महीने तक “मनरेगा बचाओ संग्राम” चलाया जाएगा। इस दौरान गांव-गांव जाकर मजदूरों को जागरूक किया जाएगा और मनरेगा से जुड़े मुद्दों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। विदित चौधरी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन गांव से संसद तक ले जाया जाएगा।
कांग्रेस सह प्रभारी ने बताया कि 8 जनवरी को प्रदेश स्तर पर बैठक आयोजित कर आंदोलन की पूरी रणनीति तैयार कर ली गई है, जिसमें संगठनात्मक ढांचे से लेकर आंदोलन की चरणबद्ध रूपरेखा तय की गई है।
विदित चौधरी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा में किए जा रहे बदलावों के जरिए ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो इस योजना की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सीधे तौर पर गरीब और मेहनतकश मजदूरों के अधिकारों पर हमला हो रहा है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह मनरेगा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी और मजदूरों के हक की लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से लड़ा जाएगा।