सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के परिसर में फर्स्ट एचपी (ब्वॉयज) बटालियन सोलन की ओर से आयोजित 10 दिवसीय वार्षिक NCC प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक जारी है। 5 जुलाई से शुरू हुए इस विशेष शिविर में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए 511 एनसीसी कैडेट्स भाग ले रहे हैं, जिनके सर्वांगीण विकास और अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

शिविर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राजीव थॉमस ने बताया कि यह प्रशिक्षण शिविर युवाओं में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी, आत्मनिर्भरता, नेतृत्व क्षमता (लीडरशिप क्वालिटी) और टीम भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिविर के दौरान कैडेट्स को कड़े शारीरिक व मानसिक प्रशिक्षण के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी व व्यावहारिक ज्ञान से भी समृद्ध किया जा रहा है।
शिविर के पांचवें दिन कैडेट्स को आधुनिक तकनीक से रूबरू करवाने के लिए एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में नौणी यूनिवर्सिटी के विस्तार शिक्षा निदेशालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजय शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की और NCC कैडेट्स को ड्रोन तकनीक के बारे में व्यावहारिक और महत्वपूर्ण जानकारी दी। डॉ. शर्मा ने कैडेट्स को विस्तार से समझाया कि सामान्य उपयोग में आने वाले जनरल ड्रोन और खेती-किसानी के काम आने वाले एग्रीकल्चर ड्रोन में क्या तकनीकी और व्यावहारिक अंतर होता है।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. अजय शर्मा ने देश की सुरक्षा और विमानन नियमों की जानकारी देते हुए ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित विभिन्न एयरस्पेस जोन के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि किसी वीवीआईपी (VVIP) के आगमन या विशेष संवेदनशील कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किस प्रकार अस्थायी तौर पर टेंपररी रेड जोन का निर्माण किया जाता है और वहां किसी भी तरह की उड़ान पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है।
इस ज्ञानवर्धक और तकनीकी सत्र के दौरान कर्नल ए.एस. सिद्धू, एसएम अनिल कुमार, ट्रेनिंग जेसीओ अतीक रहमान, नौणी यूनिवर्सिटी के एएनओ (ANO) डॉ. सुभाष शर्मा, एएनओ कमलेश, अरुण और दुष्यंत सहित बटालियन के अन्य सैन्य व प्रशासनिक अधिकारी और स्टाफ सदस्य मुख्य रूप से मौजूद रहे।