नौणी विश्वविद्यालय में परमाणु और रासायनिक आपदा प्रबंधन पर प्रशिक्षण शुरू

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By Hills Post

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में ‘रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु (CBRN) आपदाओं तथा औद्योगिक दुर्घटना तैयारी’ विषय पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आगाज़ हुआ। विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), सोलन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले में औद्योगिक और परमाणु आपदाओं से निपटने के लिए संस्थागत तैयारियों को मजबूत करना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त सोलन एवं अध्यक्ष डीडीएमए, मनमोहन शर्मा ने कहा कि आधुनिक विकास के साथ आपदाओं की जटिलता भी बढ़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब आपदा प्रबंधन का नजरिया बदल चुका है; अब ध्यान केवल राहत पहुंचाने पर नहीं बल्कि आपदा के जोखिम को कम करने और रोकथाम (Prevention) पर केंद्रित है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए बताया कि सिंगापुर जैसे देशों में परमाणु आपदा से सुरक्षा के लिए रिहायशी इलाकों में बंकर तक बनाए गए हैं, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए उनकी तैयारी को दर्शाता है।

अतिरिक्त उपायुक्त राहुल जैन ने बताया कि हालांकि सोलन जिले में अब तक ऐसी कोई बड़ी आपदा नहीं हुई है, लेकिन यहाँ बड़ा औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण संभावित खतरों से निपटने के लिए विभागों की क्षमता बढ़ाना अनिवार्य है।

प्रशिक्षण के पहले दिन तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डी. डी. शर्मा ने इंसिडेंट कमांड सिस्टम, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) के सही उपयोग और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. प्रतिमा वैद्य ने घटना के बाद पर्यावरण की निगरानी और प्रबंधन पर अपना व्याख्यान दिया। पीजीआई चंडीगढ़ से आए डॉ. रविंद्र खैवाल ने ऐसी आपदाओं की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता और डी-कंटैमिनेशन रणनीतियों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. सी. एल. ठाकुर और पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस. के. भारद्वाज ने क्षमता निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित कार्यशालाओं की सिफारिशों को इस प्रशिक्षण में शामिल किया गया है ताकि प्रतिभागी अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक भूमिकाओं को समझ सकें। इस प्रशिक्षण से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा, जिससे आपात स्थिति में एक प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी।

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