शिमला: हिमाचल प्रदेश में जल परिवहन और पर्यटन को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को कोच्चि (केरल) में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने यहां आयोजित ‘अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद’ (IWDC) की तीसरी उच्च स्तरीय बैठक में भाग लिया। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में क्रूज पोत “इंपीरियल क्लासिक” पर आयोजित इस बैठक में हिमाचल प्रदेश सरकार और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता राज्य में जल-आधारित बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और विकास के लिए एक औपचारिक रूपरेखा तैयार करेगा।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने हिमाचल के लिए दो बड़ी परियोजनाओं का खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि रावी नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-84) पर रणजीत सागर बांध से चमेरा बांध तक ‘रिवर क्रूज पर्यटन’ विकसित किया जा रहा है, जिसकी पहली जेटी (Jetty) जनवरी 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगी। इसके अलावा, सतलुज नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-98) पर एक धार्मिक पर्यटन सर्किट बनाने की संभावनाओं पर काम चल रहा है। यह सर्किट हिमाचल के तत्तापानी और नैना देवी मंदिर को पंजाब के आनंदपुर साहिब और कीरतपुर साहिब से जोड़ेगा, जिसके लिए फीजिबिलिटी स्टडी जारी है।
अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने हिमाचल प्रदेश में अंतर्देशीय जलमार्गों के त्वरित विकास की पुरजोर वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि देश की प्रमुख नदियां हिमाचल से ही निकलती हैं, इसलिए राज्य इस ढांचे में एक प्रमुख हितधारक है। उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष तकनीकी और वित्तीय सहायता की मांग करते हुए पहाड़ी पारिस्थितिकी के अनुकूल ‘हाइड्रो-इलेक्ट्रिक कैटामारन’ (Hydro-Electric Catamarans) जहाजों की मांग की। उन्होंने कहा कि ये पर्यावरण के अनुकूल जहाज प्रदेश की नाजुक इकोलॉजी के लिए सबसे उपयुक्त रहेंगे। अग्निहोत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन और रोजगार सृजन के लिए प्रतिबद्ध है।