शिमला: हिमाचल प्रदेश में इन दिनों एक ऐसे डिजिटल घोटाले का शोर है जिसने मध्यम वर्ग और बेरोजगार युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। ठगों ने लोगों को यह झांसा दिया कि उनके पास विदेशों (Foreign Countries) से किताबें स्कैन करने के बड़े प्रोजेक्ट हैं और उन्होंने इसे एक वास्तविक व्यवसाय के रूप में पेश किया, जिससे लोग आसानी से उनके बहकावे में आ गए। ‘बुक स्कैनिंग और प्रिंटिंग’ के नाम पर विदेशी प्रोजेक्ट दिलाने का इसी झांसे में फंसाकर शातिरों ने मंडी, शिमला, कुल्लू और कांगड़ा सहित कई जिलों में करोड़ों रुपये का चूना लगाया है। ठगी का यह तरीका इतना शातिर था कि लोगों ने न केवल कंपनी में निवेश किया, बल्कि लाखों रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर (कंप्यूटर और स्कैनर) भी अपने घरों में खड़ा कर लिया, जो अब महज कबाड़ बनकर रह गया है।
छोटे निवेश से विश्वास जीतने की साजिश
इस घोटाले की शुरुआत बहुत ही सधे हुए तरीके से हुई। ठगों ने सबसे पहले निवेशकों को समय पर किस्तें (Installments) देकर जाल में फंसाया। उदाहरण के लिए, ₹1.5 लाख के शुरुआती निवेश पर ₹55,000 की सात किस्तें दी गईं। जब लोगों के खातों में समय पर पैसा आने लगा, तो उनका भरोसा बढ़ गया। इसी भरोसे के जाल में फंसकर निवेशकों ने अपनी जिंदगी भर की कमाई, पेंशन का पैसा और यहाँ तक कि पुश्तैनी जमीनें गिरवी रखकर ₹5 लाख प्रति प्रोजेक्ट वाले बड़े स्लॉट खरीद लिए। कई निवेशकों ने तो 10-10 प्रोजेक्ट एक साथ ले लिए, जिससे उनका निवेश ₹50 लाख के पार चला गया।

हर प्रोजेक्ट के साथ अनिवार्य था भारी-भरकम सेटअप
शातिरों की शर्त थी कि हर एक प्रोजेक्ट स्लॉट के लिए निवेशक को अपना अलग वर्कस्टेशन लगाना होगा। इसमें निवेशक को अपनी जेब से एक कंप्यूटर (करीब ₹25,000) और एक हाई-स्पीड स्कैनर (करीब ₹30,000) खरीदना अनिवार्य था। उदाहरण के तौर पर, जिस व्यक्ति ने 10 प्रोजेक्ट लिए, उसने कंपनी को ₹50 लाख देने के साथ-साथ लगभग ₹5.50 लाख कंप्यूटर और स्कैनर पर भी खर्च किए। निवेशकों को बताया गया था कि उन्हें विदेशों से आने वाली किताबों को स्कैन करना है, लेकिन अक्टूबर-नवंबर से अचानक भुगतान बंद होने के बाद अब यह कीमती मशीनें घरों के कोनों में धूल फांक रही हैं।
बैंकों का कर्ज और परिवारों में तनाव
इस कांड ने हिमाचल के सैकड़ों परिवारों को आर्थिक रूप से अपाहिज कर दिया है। शिमला, मंडी और धर्मशाला में दर्ज मामलों के अनुसार, कई लोगों ने 30-30 लाख रुपये तक का बैंक लोन लिया था, जिसकी किस्तें चुकाना अब उनके लिए असंभव हो गया है। नकली आधार कार्ड और फर्जी दस्तावेजों के सहारे चल रहे इस गिरोह ने समाज के हर वर्ग—सेवानिवृत्त कर्मचारी से लेकर बेरोजगार युवाओं तक को निशाना बनाया है।
पंजाब और हरियाणा तक फैले हैं तार
सूत्रों के हवाले से यह भी बड़ी खबर मिल रही है कि इस महाघोटाले की जड़ें केवल हिमाचल तक सीमित नहीं हैं। जानकारी के अनुसार, इस गिरोह ने पंजाब और हरियाणा में भी बड़े स्तर पर लोगों को अपना शिकार बनाया है, जहाँ करोड़ों रुपये के निवेश डूबने की खबरें हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह अंतर्राज्यीय गिरोह एक बड़े सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा है, जिसके तार मोहाली और गुरुग्राम जैसे शहरों से जुड़े हैं।
जांच और SIT की मांग
वर्तमान में सुंदरनगर और कई अन्य जिलों में पुलिस ने पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर वित्तीय जांच शुरू कर दी है। डीएसपी सुंदरनगर भारत भूषण के अनुसार, पुलिस मामले के हर तकनीकी और बैंकिंग पहलू को खंगाल रही है। ठगी का शिकार हुए परिवारों में अब भारी तनाव है। बदनामी के डर से कई लोग खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि कर्जदार निवेशकों के सामने अब बैंक की किस्तें चुकाने का बड़ा संकट है। पीड़ितों ने अब सरकार से इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की गुहार लगाई है।