शिमला: महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद सबसे अधिक पाए जाने वाले सर्वाइकल कैंसर के खात्मे के लिए सरकार पहली बार एक विशेष राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू करने जा रही है। इस महत्वपूर्ण अभियान की रूपरेखा तय करने के लिए शनिवार को शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि 1 मार्च 2026 से आशा वर्कर घर-घर जाकर व्यापक सर्वे करेंगी और पात्र किशोरियों की पहचान करेंगी। इसके बाद 29 मार्च 2026 से यह टीकाकरण अभियान विधिवत शुरू होगा, जो अगले तीन महीने तक केवल रविवार के दिन चलाया जाएगा।

सर्वाइकल कैंसर क्या है और टीका क्यों है जरूरी?
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा (बच्चेदानी के निचले हिस्से) में होने वाली एक जानलेवा बीमारी है, जो मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के कारण फैलती है। भारत में यह महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसके हर साल लगभग 1.2 से 1.3 लाख नए मामले सामने आते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में एचपीवी वैक्सीन लगने से वायरस के संपर्क में आने से पहले ही शरीर को सर्वोत्तम सुरक्षा मिल जाती है। यह सुरक्षित और प्रभावी टीका सर्वाइकल कैंसर के मामलों को 83 प्रतिशत तक रोक सकता है। निजी अस्पतालों में इस अमेरिकी वैक्सीन (गार्डासिल) की एक खुराक की कीमत 10,000 रुपये तक है, लेकिन इस सरकारी अभियान के तहत यह पूरी तरह निशुल्क लगाई जाएगी।
कौन हैं पात्र और क्या रहेगी प्रक्रिया?
भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन किशोरियों ने 14 वर्ष की आयु पूरी कर ली है लेकिन 15 वर्ष पूरे नहीं किए हैं, वे इस टीकाकरण के लिए पात्र होंगी। इसमें प्रवासी और बेसहारा किशोरियां भी शामिल रहेंगी।
- पंजीकरण और सहमति: टीकाकरण के लिए ‘यू-विन’ (U-WIN) पोर्टल पर आशा वर्कर द्वारा किशोरियों का पंजीकरण किया जाएगा। इस प्रक्रिया में अभिभावकों की सहमति अनिवार्य है, जिसे ओटीपी (OTP) के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा।
- टीकाकरण का तरीका: बाएं हाथ के ऊपरी हिस्से में वैक्सीन की 0.5 एमएल की सिंगल डोज़ दी जाएगी।
- सावधानियां: स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किशोरियां खाली पेट टीका लगवाने न आएं। टीकाकरण के बाद 30 मिनट तक उन्हें चिकित्सा निगरानी में रखा जाएगा। हल्का बुखार या इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द होना सामान्य है।
उपायुक्त के निर्देश: कोई भी पात्र किशोरी न छूटे
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि इस अभियान के लिए पूरे जिले में 39 और शिमला शहर में 5 टीकाकरण स्थल (सरकारी अस्पताल) चिह्नित किए गए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को सभी केंद्रों पर आपातकालीन स्थितियों से निपटने के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही श्रम विभाग को प्रवासी मजदूरों के परिवारों तक पहुंचने और शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों में जागरूकता फैलाने का जिम्मा सौंपा गया है, ताकि कोई भी पात्र किशोरी इस अहम सुरक्षा चक्र से वंचित न रहे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में आईजीएमसी की प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर, सीएमओ डॉ. यशपाल रांटा, उच्च शिक्षा उपनिदेशक लेखराज भारद्वाज, जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) ममता पॉल, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विनीत, कमला नेहरू अस्पताल से डॉ. मीनाक्षी व डॉ. निशि सूद और आईजीएमसी के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।