सोलन: महान फिल्म निर्माता गुरु दत्त के जीवन, उनके सपनों और संघर्षों की कहानी एक बार फिर मंच पर जीवंत हो उठी है। दिल्ली के मशहूर थिएटर ग्रुप ‘राबता’ ने शूलिनी यूनिवर्सिटी के कैंपस में अपना चर्चित नाटक ‘बेमिसाल गुरु दत्त: ज़िंदगी, सिनेमा और ख़्वाब’ पेश किया। इस खास प्रस्तुति को देखने के लिए करीब 360 छात्र, फैकल्टी सदस्य और मेहमान मौजूद रहे। यह आयोजन सातवें शूलिनी लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत से जुड़ा पहला कार्यक्रम था। यह फेस्टिवल अगले साल 12 से 14 मार्च 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा।

यह नाटक ऐसे समय में मंचित किया गया है जब हाल ही में 10 अक्टूबर को गुरु दत्त की पुण्यतिथि और विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस गुजरे हैं। 105 मिनट के इस नाटक में गुरु दत्त की रचनात्मकता और उनकी भावनात्मक उथल पुथल को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ दिखाया गया। नाटक में संगीत, नृत्य और प्रकाश छाया के बेहतरीन तालमेल के जरिए ‘प्यासा’ और ‘कागज़ के फूल’ जैसी कालजयी फिल्में देने वाले इस निर्देशक के अकेलेपन को गहराई से उकेरा गया।
शूलिनी लिटरेचर फेस्टिवल की डायरेक्टर और यूनिवर्सिटी की चीफ लर्निंग ऑफिसर प्रो. आशू खोसला ने इस मौके पर कहा कि हम अक्सर रचनात्मकता की तारीफ करते हैं लेकिन इसके पीछे की भावनात्मक कीमत को भूल जाते हैं। गुरु दत्त का जीवन हमें बताता है कि असाधारण प्रतिभा और गहरी संवेदनशीलता एक साथ चलती हैं। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के संदर्भ में उन्होंने इसे छात्रों के लिए एक कलाकार के पीछे छिपे इंसान को समझने का बेहतरीन मौका बताया।
यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने भी कलाकारों के शानदार प्रदर्शन की काफी तारीफ की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का असली मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान पाना नहीं है, बल्कि छात्रों के भीतर संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता और सहानुभूति का विकास करना भी है। उन्होंने जोर दिया कि विश्वविद्यालयों को विज्ञान, साहित्य, सिनेमा और कला के संगम का केंद्र होना चाहिए। शानदार प्रस्तुति के बाद प्रो. पी.के. खोसला और श्रीमती सरोज खोसला ने सभी कलाकारों को मंच पर सम्मानित किया।
कहानी, कविता और लाइव संगीत के जरिए साहित्य को मंच पर जीवंत करने के लिए पहचाने जाने वाले ‘राबता’ ग्रुप ने इससे पहले साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम के रिश्ते पर ‘वो अफ़साना’ और उर्दू साहित्य पर आधारित ‘चंद किस्से’ जैसी बेहतरीन प्रस्तुतियां भी दी हैं। इस पूरे कार्यक्रम के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय के छात्र थिएटर समूह ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे उन्हें इवेंट मैनेजमेंट और थिएटर प्रोडक्शन का अच्छा व्यावहारिक अनुभव मिला।