नाहन : जिला सिरमौर में 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा इन दिनों एक अभेद्य ‘सुरक्षा कवच’ बन चुकी है। शिलाई, राजपुर और नाहन के बाद अब संगडाह के बर्फीले रास्तों पर 108 कर्मियों ने एक और जान बचाकर अपनी जांबाजी का लोहा मनवाया है। यह पिछले कुछ ही दिनों के भीतर जिले में एम्बुलेंस के भीतर सफल प्रसव का चौथा बड़ा मामला है।
बर्फीली सड़क और ‘लाइफ एंड डेथ’ की स्थिति
शनिवार शाम करीब 06:00 बजे 108 कंट्रोल रूम को संगडाह तहसील के गांव थोला (भालोना) से कॉल प्राप्त हुई। 37 वर्षीय गर्भवती महिला केदारी देवी को असहनीय प्रसव पीड़ा हो रही थी। सूचना मिलते ही सीएचसी हरिपुरधार से इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन (EMT) विनोद पचनाईक और पायलट रमेश राणा एम्बुलेंस लेकर रवाना हुए।

चुनौती केवल प्रसव की नहीं थी, बल्कि मौसम भी दुश्मन बना हुआ था। सड़क पर पाला जमा था और बर्फीली हवाओं के बीच एम्बुलेंस चलाना जान जोखिम में डालने जैसा था। अस्पताल अभी 15 किमी दूर था कि सुंदरघाट के पास महिला की स्थिति बेहद नाजुक हो गई।
अनुभवी हाथों का कमाल: गले में फंसी थी नाल
EMT विनोद ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सड़क किनारे ही प्रसव कराने का साहसी निर्णय लिया। केस बेहद जटिल था; नवजात के गले में ‘नाभि नाल’ (Umbilical Cord) लिपटी हुई थी और बच्चे ने गर्भ के भीतर ही गंदगी (पोटी) कर दी थी। ऐसी स्थिति में एक छोटी सी चूक बच्चे की जान ले सकती थी। लेकिन विनोद पचनाईक के 14 साल के अनुभव और पायलट रमेश के सहयोग से शाम 08:16 बजे महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
14 साल और 400 जिंदगियों का सफर
EMT विनोद कुमार इस सेवा के असली हीरो बनकर उभरे हैं। अपने 14 साल के कार्यकाल में वह अब तक लगभग 350 से 400 प्रसव एम्बुलेंस में ही करवा चुके हैं, जिनमें कई जुड़वां और ब्रीच (उल्टे बच्चे) केस शामिल हैं। विनोद अपनी इस कुशलता का श्रेय नाहन मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित महाजन को देते हैं, जिन्हें वह अपना आदर्श मानते हैं।
सेवा का जज्बा और अनदेखी का दर्द: सुविधाओं की बाट जोहते 108 कर्मी
एक ओर जहाँ ये 108 एम्बुलेंस कर्मी दुर्गम इलाकों में ‘भगवान’ का रूप बनकर अनमोल जिंदगियां बचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इनका अपना भविष्य आज भी अधर में लटका हुआ है। यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि हिमाचल के ये जांबाज कर्मी कड़ाके की ठंड और बर्फीले रास्तों पर 12-12 घंटे की कठिन शिफ्ट कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें मात्र ₹12,000 से ₹18,000 जैसा न्यूनतम वेतन मिल रहा है।
सिरमौर और समूचे हिमाचल के स्थानीय लोगों ने अब मुखर होकर इन कर्मचारियों के हक में आवाज़ उठानी शुरू कर दी है। जनता की पुरजोर मांग है कि विनोद कुमार जैसे अनुभवी कर्मियों, जिन्होंने अकेले दम पर सैकड़ों जानें बचाई हैं, उन्हें राज्य स्तर पर विशेष रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग के नाम पर इन कर्मियों का शोषण बंद कर सरकार को एक स्थायी नीति बनानी चाहिए, ताकि जान बचाने वाले इन हीरोज़ को उचित मानदेय, सरकारी सुरक्षा और एक सुरक्षित भविष्य मिल सके। फिलहाल, जच्चा और बच्चा दोनों सीएचसी संगडाह में सुरक्षित हैं, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि इन रक्षकों की पुकार प्रशासन कब सुनेगा।