सोलन: कृषि क्षेत्र में डेटा एकत्रीकरण को आधुनिक बनाने और सटीकता लाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने ‘डिजिटल फसल सर्वेक्षण’ (Digital Crop Survey) की शुरुआत की है। उप निदेशक कृषि डॉ. देव राज कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल खेती-किसानी के तौर-तरीकों में बड़े बदलाव लाएगी। अब मोबाइल आधारित प्रणाली, जीपीएस मैपिंग, रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर फसलों का रियल टाइम डेटा इकट्ठा किया जाएगा। इस सर्वेक्षण के माध्यम से फसल की किस्म, बुवाई का क्षेत्रफल, सिंचाई की स्थिति और फसल के स्वास्थ्य की एकदम सटीक जानकारी मिल सकेगी। इससे मानवीय भूलों की गुंजाइश कम होगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
डॉ. कश्यप ने बताया कि इस डिजिटल पहल का सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। सत्यापित डिजिटल रिकॉर्ड होने से फसल बीमा के दावों का निपटारा तेजी से हो सकेगा और आपदा या फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को उचित मुआवजा मिलना सुनिश्चित होगा। इसके अलावा, यह डेटा सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), खाद्य सुरक्षा योजना और विभिन्न कृषि योजनाओं के लिए सही नीति बनाने में मदद करेगा।
विभाग ने इस सर्वेक्षण को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है, जिसके लिए क्षेत्रीय कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एकत्रित डेटा को ‘राष्ट्रीय कृषि डेटाबेस’ के साथ एकीकृत किया जाएगा। उप निदेशक ने जिले के सभी किसानों से आग्रह किया है कि वे इस डिजिटल सर्वेक्षण में अपना पंजीकरण जरूर करवाएं ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।