सोलन: जिला के परवाणू में पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए 73 वर्षीय सतीश बेरी को गिरफ्तार किया है। खुद को समाजसेवी बताने वाले सतीश बेरी पर सरकारी अधिकारियों को आरटीआई के जरिये ब्लैकमेल करने और फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी पैसा हड़पने के गंभीर आरोप हैं। पुलिस ने यह कार्रवाई विजिलेंस की जांच रिपोर्ट और पुख्ता सबूतों के आधार पर की है। आरोपी को मंगलवार 10 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया।

इस मामले की शुरुआत 3 मार्च 2025 को हुई थी, जब रजा राम भारती ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। जांच में सामने आया कि सतीश बेरी और उसका बेटा सरकारी विभागों में ठेकेदारी करते हैं। आरोप है कि सतीश बेरी आरटीआई का डर दिखाकर अधिकारियों पर दबाव बनाता था और अपने या बेटे के लिए काम हासिल करता था। सबसे बड़ा खुलासा सेक्टर-4 स्थित हिमुडा के फ्लैटों में बिजली की टेस्ट रिपोर्ट को लेकर हुआ।
जांच में पाया गया कि इन फ्लैटों की वायरिंग का काम हिमुडा ने टेंडर के जरिए किसी और ठेकेदार से करवाया था, जिसे नियमानुसार यह रिपोर्ट मुफ्त में देनी थी। लेकिन सतीश बेरी ने बिना कोई काम किए 83 फ्लैटों की फर्जी टेस्ट रिपोर्ट नगर परिषद को सौंप दी और इसके बदले पैसे भी वसूल लिए।
हैरानी की बात यह है कि 11 जून 2020 को ही इस काम का टेंडर हुआ, उसी दिन फर्जी कोटेशन के आधार पर काम मिला और उसी दिन सतीश बेरी ने बिल भी जमा करवा दिया। एक ही दिन में सारी प्रक्रिया पूरी होना ही इस घोटाले का सबसे बड़ा सबूत बन गया। पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि कोटेशन और दस्तावेज जाली थे, जिसके बाद मामले में जालसाजी की धारा 467 भी जोड़ी गई। पुलिस अब आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि उसने और कहां-कहां इस तरह की ठगी को अंजाम दिया है।