शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार के समक्ष अनुबंध कर्मचारियों के हितों को लेकर एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। महासंघ ने सरकार से आग्रह किया है कि अनुबंध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को वर्ष में दो बार नियमित करने की पुरानी व्यवस्था को पुनः बहाल किया जाए।

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश कुमार और प्रदेश महासचिव उमेश कुमार ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वर्तमान में सरकार द्वारा वर्ष में केवल एक बार ही नियमितीकरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस बदलाव के कारण हजारों पात्र कर्मचारियों को अपने नियमितीकरण के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनमें निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।
महासंघ के पदाधिकारियों ने पुरानी व्यवस्था का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि पूर्व में सरकार द्वारा वर्ष में दो बार अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किया जाता था। उस दौरान 30 सितंबर तक दो वर्ष का अनुबंध कार्यकाल पूरा करने वाले पात्र कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ मिल जाता था, जिससे कर्मचारियों में नौकरी के प्रति सुरक्षा और स्थायित्व की भावना बनी रहती थी। नेताओं का कहना है कि अब वर्ष में केवल एक बार प्रक्रिया होने से कई ऐसे कर्मचारी, जो अपना कार्यकाल पूरा कर चुके होते हैं, उन्हें अनावश्यक रूप से अगली साइकिल तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
कर्मचारी नेताओं ने सरकार का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि अनुबंध कर्मचारी लंबे समय से विभिन्न विभागों में रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं और सरकारी सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके साथ हो रहा यह विलंब न्यायसंगत नहीं है।
महासंघ ने राज्य सरकार से पुरजोर अपील की है कि कर्मचारी हित में पूर्व की भांति वर्ष में दो बार नियमितीकरण की नीति को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए। उनका मानना है कि इस कदम से न केवल हजारों कर्मचारियों को समय पर लाभ मिलेगा, बल्कि उनके परिवारों को भी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।