नई दिल्ली: भारतीय शिक्षा जगत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के लिए यह गौरव का क्षण है। दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित एक महत्वपूर्ण संकलन में प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. दमन आहूजा के शोध अध्याय भारतीय ज्ञान प्रणाली से होगी तय विकसित भारत की राह को प्रमुखता से स्थान मिला है। यह उपलब्धि डॉ. आहूजा के गहन चिंतन और भारतीय जड़ों के प्रति उनके समर्पण का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।

डॉ. आहूजा ने अपने अध्याय में ‘माइंडफुलनेस’ (सजगता) की अवधारणा को एक नए और भारतीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया है। उनका तर्क है कि माइंडफुलनेस कोई विदेशी मनोवैज्ञानिक तकनीक नहीं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी ध्यान और योग परंपरा का हिस्सा है। यदि बचपन से ही बच्चों को इस पद्धति से शिक्षित किया जाए, तो उनमें करुणा, अनुशासन, सहनशीलता और नैतिकता जैसे मानवीय मूल्यों का स्वाभाविक विकास होता है। वर्तमान समय में नई पीढ़ी में बढ़ते तनाव और नैतिक पतन का समाधान हमारी अपनी प्राचीन शिक्षा पद्धतियों में ही छिपा है।
लेखक ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि आधुनिकता की दौड़ में हम उस ज्ञान भंडार को पीछे छोड़ रहे हैं, जो हज़ारों वर्षों के अनुभव से निर्मित हुआ है। दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा इस अध्याय को मान्यता मिलना यह सिद्ध करता है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) आज के वैश्विक परिदृश्य में भी उतनी ही सटीक और प्रभावशाली है, जितनी सदियों पहले थी।
पुस्तक का मूल उद्देश्य आज के शिक्षकों और युवाओं को उस महान परंपरा से जोड़ना है, जो हमारे समाज की आत्मा रही है। डॉ. आहूजा का मानना है कि बिना अपनी जड़ों से जुड़े ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य प्राप्त करना असंभव है। उनका यह लेखन उस भूली हुई विरासत को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने का एक सार्थक प्रयास है।
शिक्षा, संस्कृति और भारतीय परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक Amazon पर उपलब्ध है। शिक्षाविदों का मानना है कि यह संकलन आने वाले समय में नीति निर्माताओं और शिक्षकों के लिए एक मार्गदर्शिका (Guide) साबित होगा।
इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए डॉ. दमन आहूजा को शिक्षा जगत के विभिन्न दिग्गजों ने बधाई दी है। उनका यह प्रयास निश्चित रूप से भारतीय शिक्षा प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान करेगा।