शिमला: चंडीगढ़ में आयोजित प्रतिष्ठित अर्बन इनोवेशन समिट में हिमाचल प्रदेश के डिजिटल सुधारों और तकनीकी नवाचारों की गूंज सुनाई दी। इस शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया।

शिखर सम्मेलन के दौरान पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने हिमाचल प्रदेश के डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस मॉड’ की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने वहां उपस्थित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों और हितधारकों से विशेष आग्रह किया कि वे हिमाचल के इस सफल मॉडल का गहन अध्ययन करें और इसे अपने राज्यों में एक बेंचमार्क के रूप में अपनाएं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोकुल बुटेल ने कहा कि हिमाचल के शहरी केंद्र अब केवल संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे तेजी से ए.आई. (Artificial Intelligence) सक्षम स्मार्ट शहरों के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में नवाचार नागरिकों के अस्तित्व और सुविधाओं के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है।
गोकुल बुटेल ने बताया कि ए.आई. आधारित दस्तावेज सत्यापन प्रणाली से राजस्व और नगर निगम के उन कार्यों में क्रांतिकारी बदलाव आया है, जिनमें पहले हफ्तों लग जाते थे। अब रीयल-टाइम फीडबैक के कारण नागरिकों को तुरंत सुधार का मौका मिलता है। उन्होंने जानकारी दी कि डिजिटल सुधारों, विशेषकर परिवार रजिस्टर के माध्यम से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 60 करोड़ रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत हो रही है।
नवाचार के मानवीय पहलू पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हिम परिवार जैसी योजनाओं का उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और शासन में पारदर्शिता लाना है। हिमाचल की इन तकनीकी उपलब्धियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि डेटा का व्यवस्थित उपयोग सटीक नीति निर्धारण और विश्लेषण के लिए कितना अनिवार्य है।