शिमला: हिमाचल प्रदेश में वन भूमि पर अतिक्रमण के संवेदनशील मुद्दे पर नीति का प्रारूप तैयार करने के लिए राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आयोजित इस बैठक में राजस्व, वन और विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर गहन विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार द्वारा कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के बिल्कुल अनुरूप एक जनहितैषी नीति का प्रारूप तैयार करने पर गहराई से विचार किया जा रहा है। इसी दिशा में त्वरित कदम उठाते हुए बैठक में अतिरिक्त सचिव राजस्व अनिल चौहान की अध्यक्षता में एक विशेष सब-कमेटी के गठन का निर्णय लिया गया। इस महत्वपूर्ण सब-कमेटी में वन और विधि विभाग के अधिकारियों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। यह नवगठित कमेटी सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के पूर्ण अनुरूप मात्र एक सप्ताह के भीतर इस नई नीति का विस्तृत प्रारूप राज्य सरकार को सौंपेगी।
नीति निर्धारण और कानूनी पहलुओं पर चर्चा के लिए आयोजित इस अहम बैठक में प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल (वन बल प्रमुख) संजय सूद, अतिरिक्त सचिव राजस्व बलवान चंद, अतिरिक्त सचिव राजस्व सुनील वर्मा और संयुक्त सचिव विधि डॉ. विवेक ज्योति सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन सभी अधिकारियों ने राज्य में अतिक्रमण की वर्तमान स्थिति और इसके समाधान के कानूनी विकल्पों पर विस्तार से अपनी राय रखी।