शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के बच्चों, महिलाओं और संवेदनशील वर्गों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अपनी तरह की पहली स्टेट न्यूट्रिशन पॉलिसी बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और धात्री माताओं को समयबद्ध तरीके से संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाना है। मुख्यमंत्री ने विभाग को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), आंगनवाड़ी और मिड-डे-मील जैसी सरकारी योजनाओं में दिए जाने वाले राशन की समय-समय पर सख्त जांच करने के निर्देश दिए ताकि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।

खाद्य सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने कंडाघाट स्थित कंपोजिट टेस्टिंग लैब को विश्व स्तरीय हाई-एंड टेक्नोलॉजी से लैस करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, खाद्य पदार्थों की जांच में तेजी लाने के लिए चरणबद्ध तरीके से नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। पहले चरण में बद्दी, मंडी, कांगड़ा और शिमला शहर में क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी, जबकि दूसरे चरण में यह सुविधा सभी जिलों तक पहुंचाई जाएगी। विभाग की पहुंच बढ़ाने के लिए मोबाइल वैन का उपयोग किया जाएगा, जो न केवल मौके पर जांच करेगी बल्कि प्रशिक्षण और जागरूकता का कार्य भी करेगी।
मुख्यमंत्री ने विभाग को आधुनिक तकनीक अपनाने और पूरी प्रक्रिया का डिजिटाइजेशन करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सैंपल लेने से लेकर जांच के नतीजों तक की प्रक्रिया के लिए एक स्टेट पोर्टल विकसित किया जाए और एक स्टेट न्यूट्रिशन डेटाबेस तैयार हो। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग और पोषक तत्वों की कमी के कारण लोगों में बीमारियां बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य शिक्षा में विश्व स्तरीय मापदंड अपनाए जा रहे हैं और हर मेडिकल कॉलेज में आईसीयू व बेहतर डॉक्टर-पेशेंट अनुपात सुनिश्चित किया जा रहा है।