नाहन : हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 और 102 एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच विवाद गहरा गया है। मेडस्वैन फाउंडेशन द्वारा कर्मचारियों को जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) के बाद कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया है।
कर्मचारियों का कहना है कि संस्था द्वारा उन पर “संस्था-विरोधी गतिविधियों” और “अन्य कर्मचारियों को उकसाने” के जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह से झूठे और तथ्यों से परे हैं। यूनियन के अनुसार, यह नोटिस केवल इसलिए जारी किए गए हैं ताकि कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा सके और उनके मनोबल को तोड़ा जा सके।

108 एवं 102 एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन (संबद्ध सीटू) ने अपनी जायज मांगों को लेकर 5 अप्रैल से 11 अप्रैल 2026 तक प्रस्तावित हड़ताल का नोटिस पहले ही सरकार और प्रबंधन को दे दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस हड़ताल को कमजोर करने और उन्हें डराने के लिए प्रबंधन अब नोटिस और तबादलों जैसे हथकंडों का सहारा ले रहा है।
कर्मचारियों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उनसे 12-12 घंटे ड्यूटी करवाई जा रही है और उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा है। जब भी कर्मचारी यूनियन के माध्यम से इन समस्याओं को उठाते हैं, तो उन्हें धर्मपुर स्थित मुख्य कार्यालय बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है या नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।
कर्मचारियों ने प्रबंधन को चुनौती दी है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के ठोस सबूत पेश किए जाएं, अन्यथा इस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण मानकर रद्द किया जाए। यूनियन ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि हड़ताल के इस संवेदनशील समय में प्रबंधन द्वारा किए जा रहे व्यक्तिगत उत्पीड़न पर तुरंत रोक लगाई जाए। कर्मचारियों का विश्वास है कि किसी भी निष्पक्ष जांच में वे निर्दोष साबित होंगे।
कर्मचारियों ने एकजुट होकर स्पष्ट कर दिया है कि वे प्रबंधन के इस अड़ियल रवैये के आगे नहीं झुकेंगे। यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और उत्पीड़न बंद नहीं किया गया, तो प्रदेश भर में एम्बुलेंस सेवाएं ठप हो सकती हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।