शिमला: पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने के बावजूद कर्मचारी संगठनों ने सरकार के अब तक के कार्यकाल को निराशाजनक करार देते हुए आरोप लगाया है कि धरातल पर कई महत्वपूर्ण मुद्दे और वित्तीय लाभ आज भी लंबित पड़े हैं। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार एक स्पष्ट और समान नीति के तहत सभी वर्गों को न्याय देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

कर्मचारी संघ का कहना है कि ओ.पी.एस. की घोषणा के बावजूद इसका लाभ अभी तक बोर्डों, निगमों और जिला परिषद के कर्मचारियों को नहीं दिया गया है, जिससे इन वर्गों में गहरा असंतोष है। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों को देय पे कमीशन (Pay Commission) का एरियर आज तक जारी नहीं किया गया है। वर्ष 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए हजारों कर्मचारियों को उनकी ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) का भुगतान न होना बेहद चिंताजनक है। संघ ने इसे कर्मचारियों के वैधानिक और नैतिक अधिकारों का हनन बताया है।
कर्मचारी संघ का कहना है कि कर्मचारी अधिनियम 2024 के लागू होने से अनुबंध कर्मचारियों को अनुबंध अवधि के दौरान मिलने वाली वार्षिक वेतन वृद्धि से वंचित कर दिया गया है। इतना ही नहीं, पूर्व में अनुबंध कर्मियों को वर्ष में दो बार नियमित (Regularize) किया जाता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया वर्ष में केवल एक बार कर दी गई है, जिससे कर्मचारियों के नियमितीकरण में अनावश्यक देरी हो रही है। इसके अलावा, वर्ष 2022 से एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेशन (ACP) को बंद करने और सी एंड वी (C&V) अध्यापकों को 20 वर्ष की सेवा पूरी होने पर मिलने वाली विशेष वेतन वृद्धि समाप्त करने से कर्मचारियों की आर्थिक उन्नति पूरी तरह से रुक गई है। वर्ष 2012 से एसीपी की एक विशेष वेतन वृद्धि के मामले में सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (SLP) दायर करने से भी कर्मचारियों को राहत मिलने में देरी हो रही है।
कर्मचारी संघ का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ते (DA) के लिए भी तरसना पड़ रहा है। वर्तमान में डीए की पांच किस्तें लंबित हैं और पूर्व में जारी की गई तीन किस्तों का एरियर भी अभी तक नहीं मिला है। कर्मचारी संघ ने सरकार से मांग की है कि एक समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर सभी लंबित देयकों का तुरंत भुगतान सुनिश्चित किया जाए, अनुबंध कर्मचारियों की वेतन वृद्धि बहाल हो, नियमितीकरण वर्ष में दो बार किया जाए और एसीपी सहित डीए की सभी लंबित किस्तें जारी की जाएं। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही कर्मचारी संगठनों के साथ सार्थक संवाद कर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।