कुल्लू: कुल्लू घाटी के किसान अब अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए पारंपरिक फसलों के साथ-साथ लहसुन और मसाला फसलों की व्यावसायिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में बजौरा स्थित क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में दो दिवसीय जिला स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जिले भर से आए 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया और खेती की नई तकनीकें सीखीं।

वैज्ञानिक तरीकों से बढ़ेगा मुनाफा
यह आयोजन डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया गया। मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद किसानों को वैज्ञानिक तरीकों और अच्छी क्वालिटी के बीजों के बारे में जानकारी देना था। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) कुल्लू के हेड डॉ. सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि कुल्लू की आबोहवा लहसुन और मसालों के लिए बेहतरीन है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि अगर वे वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत किस्मों को अपनाएंगे, तो मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है।
बीज की क्वालिटी सबसे अहम
बीज विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. एन. के. भरत ने अच्छी पैदावार के लिए क्वालिटी सीड यानी गुणवत्तापूर्ण बीज को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि मसालों की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है, इसलिए सही बीज का चयन करना जरूरी है। वहीं, केंद्र के सह-निदेशक डॉ. बी.एस. ठाकुर और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक ठाकुर ने किसानों को बताया कि वे कैसे विदेशी (एक्जॉटिक) मसालों की खेती कर सकते हैं और इसके लिए प्रमाणित बीज कैसे तैयार किए जा सकते हैं।
खेतों में जाकर समझी तकनीक
संगोष्ठी के दौरान तकनीकी सत्रों में बीमारी की रोकथाम, सिंचाई और फसल के बाद के प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा हुई। सबसे खास रहा किसान-वैज्ञानिक संवाद सत्र, जहां किसानों ने अपनी समस्याओं का सीधा समाधान पाया। कार्यक्रम के समापन पर मसाला खेती में बेहतरीन काम करने वाले तीन किसानों को सम्मानित भी किया गया। अंत में सभी किसानों को बजौरा केंद्र के खेतों का भ्रमण करवाया गया, जहां उन्होंने नई किस्मों और वैज्ञानिक परीक्षणों को अपनी आंखों से देखा।