शिमला: हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट और केंद्र से मदद के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। शनिवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला। बिंदल ने आंकड़ों की एक लंबी लिस्ट रखते हुए दावा किया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को दिल खोलकर मदद दी है, लेकिन राज्य सरकार अपनी प्रशासनिक नाकामी और फिजूलखर्ची को छिपाने के लिए केंद्र पर दोष मढ़ रही है।

डॉ. बिंदल ने हाल ही में हुई सर्वदलीय बैठक की गंभीरता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार समाधान को लेकर गंभीर ही नहीं थी। बैठक में न तो सत्ताधारी दल के प्रदेश अध्यक्ष मौजूद थे और न ही उपमुख्यमंत्री या संबंधित विभाग के मंत्री को बुलाया गया था। इससे साफ है कि सरकार का मकसद सर्वसम्मति बनाना नहीं, बल्कि सिर्फ एक राजनीतिक माहौल तैयार करना था।
बिंदल ने वित्त विभाग के सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि केंद्र ने केंद्रीय करों में हिमाचल का हिस्सा 0.830% से बढ़ाकर 0.914% कर दिया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि वर्ष 2026 में प्रदेश को करीब 13,950 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो पिछले साल के मुकाबले 2,450 करोड़ रुपये ज्यादा हैं। इसके अलावा ग्रामीण-शहरी विकास और एसडीआरएफ (SDRF) के तहत भी हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान है।
भाजपा अध्यक्ष ने पुराने वित्त आयोगों की तुलना करते हुए कहा कि 6वें वित्त आयोग में हिमाचल को सिर्फ 161 करोड़ मिले थे, 12वें में यह राशि 10,202 करोड़ थी। लेकिन केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद 14वें वित्त आयोग में 40,624 करोड़ और 15वें वित्त आयोग में करीब 48,000 करोड़ रुपये हिमाचल को मिले।
यही नहीं, राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के आंकड़ों पर गौर करें तो 2004 से 2014 के बीच (यूपीए सरकार के समय) हिमाचल को 18,091 करोड़ मिले, जबकि 2015 से 2025 के बीच (एनडीए सरकार के समय) यह राशि बढ़कर 89,254 करोड़ हो गई।
बिंदल ने आरोप लगाया कि इतना पैसा मिलने के बाद भी राज्य सरकार ने विकास ठप कर दिया है। संस्थान बंद किए जा रहे हैं और कर्मचारियों को पेंशन-भत्ते नहीं मिल रहे। उल्टे सरकार ने डीजल, सीमेंट, बिजली, स्टाम्प ड्यूटी और बस किराया बढ़ाकर जनता की कमर तोड़ दी है।
बिंदल ने दावा किया कि अगर सभी केंद्रीय योजनाओं, वर्ल्ड बैंक, नाबार्ड और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को जोड़ लिया जाए तो केंद्र ने हिमाचल को करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये की मदद दी है। अकेले नेशनल हाईवे और फोरलेन पर 46,000 करोड़ रुपये का काम चल रहा है। उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि वे राजनीति छोड़कर प्रशासनिक दक्षता पर ध्यान दें और केंद्र के 12.2 लाख करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर बजट का फायदा उठाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार करें।