क्या सच में स्मार्ट मीटर से आया 12,000 बिल? जानिए बिजली बोर्ड की पड़ताल में क्या निकला सच

सोलन : हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड ने सोलन जिले की ग्राम पंचायत जौणाजी में आयोजित ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम में स्मार्ट मीटर और बिजली बिल को लेकर उठाए गए सवालों पर कड़ा रुख अपनाया है। बोर्ड के प्रवक्ता ने शिमला में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि दिलीप सिंह नामक व्यक्ति द्वारा लगाए गए सभी आरोप न केवल निराधार हैं, बल्कि वास्तविकता से कोसों दूर हैं।

बोर्ड के प्रवक्ता ने तथ्यों के साथ खुलासा किया कि दिलीप सिंह ने जिस ₹12,000 के असामान्य बिल का हवाला दिया था, वह वास्तव में 14 महीनों (दिसंबर 2024 से जनवरी 2026) का बकाया बिल है। वर्तमान में यह राशि बढ़कर ₹13,906 हो गई है। बोर्ड के अनुसार, यह उपभोक्ता आदतन डिफाल्टर है। इससे पहले भी उसने नवंबर 2023 से नवंबर 2024 तक का बिल भुगतान नहीं किया था, जिसे करीब एक साल बाद दिसंबर 2024 में भरा गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि मई 2025 में स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उपभोक्ता ने एक भी पैसा जमा नहीं किया है, जिसके कारण 22 जनवरी 2026 को उसकी बिजली अस्थायी रूप से काट दी गई थी।

विद्युत बोर्ड की जांच में यह भी सामने आया है कि दिलीप सिंह के नाम पर दो अन्य घरेलू और एक व्यावसायिक (Commercial) मीटर भी लगा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इन सभी का बिल लंबे समय से लंबित है। इनमें से एक घरेलू मीटर का बिल जून 2023 से और दूसरे का दिसंबर 2024 से बकाया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता जानबूझकर भुगतान नहीं कर रहा है और सार्वजनिक मंचों पर सरकार व बोर्ड की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।

विद्युत खंबे के विवाद पर भी बोर्ड ने स्थिति साफ की है। अधिकारियों की जांच में पाया गया कि जिस खंबे पर आपत्ति जताई गई है, वह सड़क के किनारे पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से स्थित है। जांच में संकेत मिले हैं कि दिलीप सिंह ने अपना घर लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़क और बिजली के खंबे की ओर बढ़ाकर बनाया है, न कि बोर्ड ने गलत जगह खंबा लगाया है। बोर्ड ने आम जनता से आग्रह किया है कि वे ऐसी भ्रामक खबरों और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें।

Photo of author

पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।