चौपाल: श्री विजट महाराज की पावन धरा सराहां में चूड़ेश्वर सेवा समिति का 23वाँ वार्षिक महाधिवेशन रविवार को अपार उत्साह और भक्तिमय वातावरण में हजारों शिरगुल भक्तों ने भाग लिया। हिमाचल और उत्तराखंड के शिरगुल भक्तों की उपस्थिति में आयोजित इस महाधिवेशन में चूड़धार आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने और समिति की कार्यप्रणाली में सुधार लाने हेतु 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें मंजूरी दी गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक मंगलाचरण के साथ हुआ, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। समिति के केंद्रीय अध्यक्ष बीएम नंटा, महासचिव सुनील कमल और वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप ममगाईं ने स्पष्ट किया कि समिति का मुख्य उद्देश्य सेवा कार्यों को सुदृढ़ करना और चूड़धार आने वाले भक्तों के अनुभव को गुणात्मक रूप से सुधारना है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय का अनुमोदन किया गया और वर्ष 2026-27 के लिए नए बजट अनुमानों को स्वीकृति दी गई। चूड़धार में चलने वाले भंडारे की गुणवत्ता, स्वच्छता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नए सुरक्षा मानक तय किए गए। श्रद्धालुओं के रात्रि विश्राम, आवास और स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक आधुनिक बनाने के सुझावों पर निर्णय लिए गए। नौहराधार-चूड़धार और मंडाहा-चूड़धार जैसे प्रमुख पैदल रास्तों की सुरक्षा और वहां मिलने वाली सुविधाओं के विकास के लिए प्रस्ताव पारित किए गए।
नौहराधार, सराहां और तराहां में स्थित समिति की धर्मशालाओं के बेहतर रख-रखाव और प्रबंधन हेतु नई कार्ययोजना बनाई गई। समिति के पूर्ण पंजीकरण की स्थिति की समीक्षा की गई और प्रशासनिक ढांचे में आवश्यक बदलावों पर चर्चा हुई ताकि कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी हो सके।
महाधिवेशन के दौरान वर्ष 2026 की स्मारिका एवं मार्गदर्शिका के प्रकाशन की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जो जल्द ही श्रद्धालुओं को यात्रा में सहायता के लिए उपलब्ध होगी। समिति ने अपनी क्षेत्रीय इकाइयों के विस्तार और समन्वय के लिए नई रणनीति निर्धारित की है, ताकि शिरगुल महाराज का यह आध्यात्मिक संगठन समाज सेवा में और भी अग्रणी भूमिका निभा सके।
इस अवसर पर कोषाध्यक्ष चेतराम शर्मा, नारायण चौहान, रमेश शर्मा, जोगिंदर चौहान, रामभज चौहान, हीरानंद मेहता, ग्यार सिंह नेगी, और अमर सिंह शास्त्री सहित हिमाचल और उत्तराखंड की विभिन्न इकाइयों के हजारों पदाधिकारी और श्रद्धालु मौजूद रहे। समिति के पदाधिकारियों ने अंत में विश्वास दिलाया कि लिए गए निर्णयों को धरातल पर उतारने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ कार्य किया जाएगा, ताकि चूड़धार आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु सुखद और सुरक्षित यात्रा का अनुभव कर सके।