नाहन : एक ओर देश में “डिजिटल इंडिया” का दावा किया जा रहा है, वहीं हिमाचल प्रदेश में e-District पोर्टल आम आदमी और लोकमित्र केंद्र संचालकों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। जमाबंदी, आय प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, बोनाफाइड सहित कई आवश्यक सेवाएं ऑनलाइन तो कर दी गई हैं, लेकिन तकनीकी खामियां लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद कर रही हैं।
वेबसाइट डाउन, आवेदन अधूरे
प्रदेश भर में पोर्टल के बार-बार ठप होने की शिकायतें मिल रही हैं। कभी वेबसाइट नहीं खुलती, कभी लॉगिन फेल हो जाता है, तो कभी आवेदन के दौरान एरर आ जाती है। कई बार अपलोड की गई फोटो और दस्तावेज अपने आप हट जाते हैं। ड्रॉपडाउन मेन्यू काम नहीं करता और फॉर्म सबमिट नहीं हो पाता।

“Correction” बना नई मुसीबत
जब किसी आवेदन में अधिकारी द्वारा “Correction” लगाया जाता है तो समस्या और गंभीर हो जाती है। आवेदक जैसे ही सुधार करने के लिए दोबारा लॉगिन करता है, सिस्टम नई तकनीकी बाधाएं खड़ी कर देता है। कई मामलों में पहले से अपलोड की गई फोटो अपने आप गायब हो जाती है और जरूरी दस्तावेज हटे हुए दिखाई देते हैं।
यहीं तक बात सीमित नहीं रहती। ड्रॉपडाउन मेन्यू काम करना बंद कर देता है, जिससे जरूरी विकल्प चुने ही नहीं जा पाते। नतीजतन फॉर्म दोबारा सबमिट नहीं हो पाता और पूरा आवेदन अधर में लटक जाता है। फीस पहले ही कट चुकी होती है, इसलिए आवेदक न तो नया आवेदन कर सकता है और न ही पुराने में सुधार पूरा कर पाता है।
नाहन के लोकमित्र केंद्र संचालक राजेश शर्मा का कहना है, “जब Correction आता है तो कई बार फोटो अपने आप हट जाती है। सिस्टम दोबारा अपलोड करने नहीं देता और फॉर्म सबमिट नहीं होता। जनता हमसे जवाब मांगती है, जबकि समस्या पोर्टल में होती है।”
वहीं शिलाई क्षेत्र के आवेदक संदीप कुमार ने बताया, “मेरे आवेदन में सुधार आया, लेकिन लॉगिन करने पर दस्तावेज गायब थे। पैसे पहले ही कट चुके थे। नया आवेदन भी नहीं कर पाया। कई दिन तक चक्कर लगाने पड़े, फिर भी समाधान नहीं मिला।”
ऊपर से फीस लगभग दोगुनी
लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि हाल ही में कई सेवाओं की सरकारी फीस लगभग दोगुनी कर दी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सेवा में बार-बार तकनीकी बाधाएं आ रही हैं, पोर्टल स्थिर नहीं है, और आवेदन समय पर निपट नहीं रहे—तो बढ़ी हुई फीस का औचित्य क्या है? जनता का कहना है कि पहले व्यवस्था को मजबूत किया जाए, फिर शुल्क बढ़ाया जाए।
शिकायत तंत्र भी सवालों के घेरे में
संबंधित विभाग से संपर्क करने पर अक्सर “तकनीकी दिक्कत” कहकर मामला टाल दिया जाता है। ग्राहक सेवा नंबरों पर फोन नहीं उठाए जाते। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
आम आदमी की दोहरी मार
एक तरफ बढ़ी हुई फीस, दूसरी तरफ तकनीकी खामियां—इस दोहरी मार से आम आदमी परेशान है। मजदूरी छोड़कर दस्तावेज बनवाने आए लोग दिनभर इंतजार करते हैं और सर्वर डाउन होने पर खाली हाथ लौट जाते हैं।
क्या डिजिटल सेवा सच में सुविधा है?
डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता और समय की बचत था, लेकिन मौजूदा हालात में लोग सवाल उठा रहे हैं—क्या यह सच में सुविधा है या फिर नई मुसीबत? जब तकनीकी खामियों के कारण आवेदन अटक जाए और समाधान का कोई स्पष्ट रास्ता न मिले, तो भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
लोगों की मांग है कि पोर्टल 24×7 स्थिर और त्रुटिरहित चले, ताकि बार-बार सर्वर डाउन की समस्या न आए। Correction की प्रक्रिया के दौरान अपलोड किया गया डेटा और फोटो पूरी तरह सुरक्षित रहें। यदि किसी तकनीकी कारण से आवेदन फेल होता है तो स्वतः रिफंड या री-ओपन की सुविधा मिले। हाल ही में बढ़ाई गई फीस का स्पष्ट औचित्य भी सार्वजनिक किया जाए और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि आम नागरिक को बेवजह परेशान न होना पड़े।