नाहन : आधुनिकता के इस दौर में जहाँ मशीनें चंद सालों में कबाड़ हो जाती हैं, वहीं जिला सिरमौर के ऐतिहासिक शहर नाहन में एक ऐसी मशीन है जो एक सदी बीत जाने के बाद भी शान से अपना काम कर रही है। हम बात कर रहे हैं नाहन के ऐतिहासिक चौगान मैदान की शोभा बढ़ाने वाले उस रोड रोलर की, जिस पर वर्ष 1921 अंकित है। 105 साल की उम्र पार कर चुका यह रोलर आज भी चौगान मैदान को समतल करने के काम आता है।
1920 के दशक में भारत में ज्यादातर रोड रोलर इंग्लैंड की मशहूर कंपनियों जैसे ‘Aveling & Porter’ या ‘Marshall, Sons & Co.’ द्वारा बनाए जाते थे। नाहन के इस रोलर के पहियों और इंजन के हिस्सों को गौर से देखने पर आज भी इन विदेशी कंपनियों की छाप नज़र आती है। प्रथम विश्व युद्ध के ठीक बाद के दौर की यह मशीन महाराजा अमर प्रकाश के शासनकाल की याद दिलाती है, जिसे खास तौर पर नाहन की सड़कों और मैदानों के लिए विदेशों से मंगवाया गया था।

हैरानी की बात यह है कि आज के दौर में जब बाज़ार में अत्याधुनिक, हल्के और हाई-टेक वाइब्रेटरी रोलर्स उपलब्ध हैं, नाहन नगर परिषद के पास इस पुराने दिग्गज का कोई विकल्प नहीं है। चर्चा यह भी है कि शायद नगरपालिका के पास नया और आधुनिक रोलर खरीदने का पर्याप्त बजट ही नहीं है, जिसके चलते इसी ‘एंटीक’ मशीन से काम चलाने की मजबूरी है।
भले ही इसे मजबूरी कहा जाए, लेकिन स्थानीय खेल प्रेमियों और जानकारों का तर्क कुछ अलग है। उनका कहना है कि “चौगान की पिच और मैदान को जो मजबूती और फिनिशिंग यह 105 साल पुराना रोलर देता है, वह आज के हल्के वाइब्रेटरी रोलर नहीं दे सकते। इसका भारी-भरकम वजन मिट्टी को इस तरह बैठा देता है कि खिलाड़ी सुरक्षित महसूस करते हैं।”
लगभग 2 टन वजनी यह रोलर आज एक ‘वर्किंग हेरिटेज’ (जीवंत विरासत) बन चुका है। आमतौर पर ऐसी मशीनें संग्रहालयों में धूल फांकती हैं, लेकिन नाहन में यह आज भी पसीना बहा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इसे सहेजने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर यह बजट की कमी के चलते इसी तरह तब तक घिसता रहेगा जब तक यह पूरी तरह थक न जाए?
नाहन का यह 1921 का रोड रोलर ब्रिटिश इंजीनियरिंग की मजबूती की कहानी तो सुनाता ही है, साथ ही हमारे स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति पर भी मौन सवाल खड़े करता है। फिर भी, चौगान की हरियाली और समतल ज़मीन इस ‘बूढ़े सिपाही’ की मुस्तैदी की गवाही दे रही है।