नाहन : सिरमौर जिले के दुर्गम क्षेत्रों में 108 एम्बुलेंस सेवा एक बार फिर जीवनदायिनी साबित हुई है। आज कालाअंब लोकेशन पर तैनात 108 एम्बुलेंस की टीम ने अपनी सूझबूझ और तत्परता से एक गर्भवती महिला का सफल प्रसव करवाया।
जानकारी के अनुसार, नागल सुकेती क्षेत्र की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने 108 एम्बुलेंस को सूचित किया। सूचना मिलते ही एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और मरीज को नाहन अस्पताल ले जाया जाने लगा। लेकिन रास्ते में महिला की प्रसव पीड़ा काफी बढ़ गई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए EMT पीयूष और पायलट मनीष ने एम्बुलेंस को रास्ते में सुरक्षित स्थान पर रोका। EMT पीयूष ने अपनी ट्रेनिंग का सही इस्तेमाल करते हुए एम्बुलेंस में ही सफल डिलीवरी करवाई। दोपहर करीब 12:30 बजे महिला ने एक सुंदर बेटी (Baby Girl) को जन्म दिया।
सफल प्रसव के बाद स्टाफ ने प्राथमिक उपचार दिया और अब जच्चा-बच्चा दोनों को नाहन अस्पताल लाया जा रहा है। परिजनों ने संकट के समय देवदूत बनकर आए EMT पीयूष और पायलट मनीष का तहे दिल से धन्यवाद किया है। स्थानीय लोगों ने भी एम्बुलेंस स्टाफ की इस बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की है।
एक ओर जहाँ ये 108 एम्बुलेंस कर्मी दुर्गम इलाकों में ‘भगवान’ का रूप बनकर अनमोल जिंदगियां बचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इनका अपना भविष्य आज भी अधर में लटका हुआ है। यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि हिमाचल के ये जांबाज कर्मी कड़ाके की ठंड और बर्फीले रास्तों पर 12-12 घंटे की कठिन शिफ्ट कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें मात्र ₹12,000 से ₹18,000 जैसा न्यूनतम वेतन मिल रहा है।
सिरमौर और समूचे हिमाचल के स्थानीय लोगों ने अब मुखर होकर इन कर्मचारियों के हक में आवाज़ उठानी शुरू कर दी है।क्षेत्रवासियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग के नाम पर इन कर्मियों का शोषण बंद कर सरकार को एक स्थायी नीति बनानी चाहिए, ताकि जान बचाने वाले इन हीरोज़ को उचित मानदेय, सरकारी सुरक्षा और एक सुरक्षित भविष्य मिल सके। फिलहाल, जच्चा और बच्चा दोनों सीएचसी संगडाह में सुरक्षित हैं, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि इन रक्षकों की पुकार प्रशासन कब सुनेगा।