नाहन : सिरमौर जिले के डॉ. वाई.एस. परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में अल्ट्रासाउंड सुविधा प्रभावित होने से मरीजों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। रेडियोलॉजी विभाग में फैकल्टी की भारी कमी और आधे बैच के अवकाश पर होने के कारण फिलहाल केवल भर्ती मरीजों और गर्भवती महिलाओं के ही अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं, जबकि सामान्य ओपीडी मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
रेडियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों को एनएमसी की गाइडलाइन के अनुसार रेडिएशन एक्सपोजर के चलते अनिवार्य अवकाश दिया जा रहा है। हालांकि पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज में यह स्थिति अब मरीजों पर भारी पड़ने लगी है। वर्तमान में रेडियोलॉजी के स्वीकृत 10 पदों में से 6 पद रिक्त हैं और शेष में से भी अवकाश के चलते केवल एक डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में प्रतिदिन 100 के करीब अल्ट्रासाउंड की जरूरत को पूरा करना बेहद कठिन हो गया है।

कफोटा से आई एक महिला मरीज रमा शर्मा ने आरोप लगाया कि अस्पताल में स्पष्ट सूचना प्रणाली नहीं है। एक मरीज ने कहा, “सुबह से लाइन में खड़े रहते हैं, पर्ची कटती है, डॉक्टर जांच लिख देता है और बाद में कहा जाता है कि अल्ट्रासाउंड नहीं होगा। यह सरासर अव्यवस्था और मरीजों के साथ खिलवाड़ है।”
बेचाड़ का बाग़ क्षेत्र से आए एक अन्य महिला जानकी ने बेहद सख्त लहजे में कहा, “यह अस्पताल अब सिर्फ नाम का सरकारी अस्पताल रह गया है। गरीब आदमी निजी अस्पताल में 1500–2000 रुपये का अल्ट्रासाउंड नहीं करवा सकता, तभी तो यहां आता है। जब यहां भी सुविधा नहीं मिलती तो हम जाएं कहां? क्या गरीब आदमी का इलाज करवाना गुनाह है?”
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष सेवानिवृत्ति के करीब हैं और सीनियर रेजिडेंट्स का तीन साल का टेन्योर भी पूरा होने जा रहा है। यदि समय रहते नई फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हुई, तो रेडियोलॉजी सेवाएं और अधिक प्रभावित हो सकती हैं।
मेडिकल कॉलेज नाहन की कार्यवाहक प्रधानाचार्य डॉ. संगीत ढिल्लों और मेडिकल अधीक्षक डॉ. रेणु चौहान ने स्पष्ट किया कि फिलहाल मशीनरी स्तर पर कोई समस्या नहीं है, लेकिन फैकल्टी की कमी और अवकाश के कारण अल्ट्रासाउंड सेवाओं की रफ्तार धीमी हुई है। उन्होंने बताया कि उपलब्ध संसाधनों से व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।