नाहन : हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन स्थित पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में शिक्षा के मंदिर को अंधेरे में धकेलने का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। बिजली बोर्ड की जिद और संवेदनहीनता के चलते पिछले 6 दिनों से यहाँ पढ़ रहे करीब 625 छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। बोर्ड परीक्षाओं के इस महत्वपूर्ण समय में, जब छात्रों को एक-एक मिनट की कीमत चुकानी पड़ती है, तब बिजली बोर्ड ने बिना किसी पूर्व सूचना के विद्यालय के 7 मुख्य कनेक्शन काट दिए। विडंबना देखिए कि स्कूल प्रबंधन ने 4 लाख रुपये का चेक भी थमाया, लेकिन ‘प्रीपेड मीटर’ के तकनीकी नियमों की आड़ में विभाग बच्चों की पढ़ाई को अंधेरे में रखने पर आमादा है।
हैरानी की बात यह है कि बिजली बोर्ड ने इस कार्रवाई से पहले न तो विद्यालय प्रशासन को आगाह किया और न ही कोई नोटिस दिया। बोर्ड का तर्क है कि मीटर अब ‘प्रीपेड’ हो चुके हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी नियमों की फाइलें बच्चों के करियर से ज्यादा कीमती हैं? स्कूल के हॉस्टल और एकेडमिक ब्लॉक में बिजली न होने के कारण छात्र कड़कड़ाती ठंड में जनरेटर के भरोसे रहने को मजबूर हैं। जनरेटर की सीमित क्षमता के कारण रात के समय छात्र पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों पर पड़ना तय है।

प्रिंसिपल जेपी बलोदी के अनुसार, सरकार की अपनी अधिसूचना कहती है कि शिक्षण संस्थानों को मार्च तक का समय दिया जा सकता था, लेकिन विभाग ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इस गंभीर मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय, स्थानीय मंत्री और सांसद सुरेश कश्यप तक गुहार लगाई गई है, लेकिन अभी तक समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले हैं। जनप्रतिनिधियों की यह चुप्पी और प्रशासन की सुस्ती उस समय और ज्यादा खटकती है जब देश ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘पढ़ेगा इंडिया’ के नारे लगा रहा है।
सर्द रातों में बिना लाइट के हॉस्टल में रह रहे मासूम छात्र अब सिस्टम से सवाल पूछ रहे हैं कि “अगर हमारी परीक्षाएं खराब हुईं, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?” क्या बिजली बोर्ड के अधिकारियों को इन बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा प्रीपेड मीटर की सेटिंग की चिंता है? प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत हस्तक्षेप कर बिजली बहाल करे, वरना यह मामला न केवल एक तकनीकी चूक, बल्कि एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही के रूप में देखा जाएगा।