शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भाग लिया। इस वर्ष बैठक का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ रखा गया था। बैठक में मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौजूदा गंभीर वित्तीय चुनौतियों को देश के सर्वोच्च मंच पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री से राज्य के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक विशेष उच्चस्तरीय समिति गठित करने की पुरजोर वकालत की।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केंद्र सरकार एक विशेष समिति का गठन करे, जो हिमाचल को हो रहे वित्तीय नुकसान का सटीक आकलन कर सके।
राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) की समाप्ति से राज्य की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा है। हाल के वर्षों में आई भीषण आपदाओं से बुनियादी ढांचे को हुआ भारी नुकसान हुआ है। वर्तमान कर प्रणाली के कारण पिछले 8 वर्षों में राज्य को लगभग ₹25,000 करोड़ के राजस्व की हानि हुई है तथा जलविद्युत परियोजनाओं में राज्य को मिलने वाले मुफ्त बिजली के कोटे में कटौती की गई है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि देश की प्रगति में बहुमूल्य योगदान देने के बावजूद हिमाचल को उसका न्यायोचित हिस्सा नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान खत्म होने की भरपाई के लिए केंद्र द्वारा दिए गए ₹25,000 करोड़ नाकाफी हैं। विकास कार्यों को सुचारू रखने के लिए इसे बढ़ाकर ₹50,000 करोड़ किया जाए।
भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल अपने जंगलों और पर्यावरण से देश को प्रतिवर्ष ₹90,000 करोड़ मूल्य की इकोसिस्टम सेवाएं देता है, लेकिन इसके बदले राज्य को कोई आर्थिक प्रतिप्रति नहीं मिलती। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से राज्य को अपने हिस्से की लगभग ₹7,000 करोड़ की बकाया राशि मिलने का अभी भी इंतजार है।
भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के बावजूद केंद्र द्वारा घोषित ₹1,500 करोड़ की विशेष सहायता राशि अभी तक हिमाचल को प्राप्त नहीं हुई है।
13,000 मेगावाट बिजली: प्रदेश में लगभग 13,000 मेगावाट जलविद्युत का उत्पादन होने के बाद भी राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हक नहीं मिल रहा है।
शानदार प्रशासनिक सुधार: मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ सदन को अवगत कराया कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश वर्ष 2025 में पूर्ण साक्षर राज्य घोषित हो चुका है। इसके अतिरिक्त, स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (Performance Grading Index) में हिमाचल ने देश भर में 6ठा स्थान हासिल किया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में जब सुक्खू सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब राज्य इस रैंकिंग में 21वें पायदान पर था।
उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) 43 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत (28.4%) से कहीं अधिक है। हिमाचल प्रदेश को ‘वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री ने कांगड़ा के गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार और विकास का मुद्दा प्रधानमंत्री के समक्ष रखा।
उन्होंने राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत प्रदेश के 1.5 लाख सबसे गरीब परिवारों की पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। हरित ऊर्जा राज्य: उन्होंने बताया कि हिमाचल सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी स्टोरेज के बूते देश का अग्रणी ‘हरित राज्य’ बनने की ओर अग्रसर है। साथ ही उन्होंने चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना में राज्य के हितों को सुरक्षित रखने की मांग की।
बैठक के अंतिम सत्रों में मुख्यमंत्री ने बच्चों के पोषण कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता जताई। उन्होंने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के डेटा प्रबंधन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली विकसित करने पर बल दिया। इसके अलावा, राज्य में पैर पसार रहे नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और राज्य के खुफिया तंत्र (Intelligence Bureau) के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए केंद्र से सहयोग मांगा।
इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, नीति आयोग के उपाध्यक्ष व सीईओ सहित हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के.के. पंत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।