सोलन: भारत और नेपाल के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। हिमाचल प्रदेश के नौणी स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय ने नेपाल के 49 कृषि अधिकारियों और किसानों के लिए 10 दिन का एक खास ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा किया है। इस कार्यक्रम में नेपाल के सात अलग अलग प्रांतों से आए 44 अधिकारी और पांच प्रगतिशील किसान शामिल हुए।

यह खास ट्रेनिंग दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों की एक साझा पहल का तीसरा चरण था। इसका मुख्य मकसद नेपाल के किसानों और अधिकारियों को खेती की वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों से जोड़ना था। ट्रेनिंग के दौरान ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सेब और अखरोट की पैदावार पर सबसे ज्यादा फोकस रखा गया। इसके अलावा नेपाल से आए दल को मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, प्राकृतिक खेती और फूलों की व्यावसायिक खेती की भी बारीकियां सिखाई गईं। इस दौरान सिर्फ कक्षा में पढ़ाई नहीं हुई बल्कि खेतों में जाकर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया ताकि नेपाल के अधिकारी और किसान अपनी रोजमर्रा की चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान समझ सकें।
कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने भारत और नेपाल के पुराने और दोस्ताना रिश्तों का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर न सिर्फ फसल की पैदावार बढ़ाई जा सकती है बल्कि किसानों की आमदनी में भी बड़ा इजाफा हो सकता है। मधुमक्खी पालन के फायदों पर बात करते हुए उन्होंने रॉयल जेली और मधुमक्खी के जहर के चिकित्सकीय इस्तेमाल की जानकारी भी दी। इसके साथ ही विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. डी.पी. शर्मा ने फलों की वैज्ञानिक खेती को रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए बहुत जरूरी बताया।
इस 10 दिन की लंबी ट्रेनिंग के दौरान नेपाली दल ने मशोबरा के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, कंडाघाट के कृषि विज्ञान केंद्र और सोलन के मशरूम अनुसंधान निदेशालय का दौरा भी किया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागियों ने इस साझा पहल की काफी तारीफ की। उनका मानना है कि सेब और अखरोट की खेती को लेकर जो तकनीकी ज्ञान उन्हें यहां मिला है उससे आने वाले समय में नेपाल में फल उत्पादन और खेती के तरीकों में काफी सुधार आएगा।