सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा प्रायोजित 21 दिवसीय ‘विंटर स्कूल’ का विधिवत शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय अनुकूलित मूल्य श्रृंखला के माध्यम से बागवानी फसलों में कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देना’ रखा गया है। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति और मुख्य अतिथि प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को बागवानी क्षेत्र में शोध और नवाचार को आधार बनाकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

प्रो. चंदेल ने बागवानी फसलों के नष्ट होने की उच्च दर पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में कटाई के बाद (पोस्ट-हार्वेस्ट) उचित रखरखाव, भंडारण और प्रसंस्करण की कमी के कारण लगभग 30 प्रतिशत फसल बर्बाद हो जाती है, जो किसानों के लिए भारी आर्थिक नुकसान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि हम केवल ‘उत्पादन-केंद्रित’ खेती तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी सोच को बदलकर ‘उद्यम-आधारित’ और बाजार से जुड़ी कृषि की ओर बढ़ें। बागवानी में रोजगार और आय वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इसे साकार करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है।
कुलपति ने मूल्य श्रृंखला (Value Chain) के हर चरण में वैज्ञानिक हस्तक्षेप की वकालत की। उन्होंने वरिष्ठ वैज्ञानिकों से अपील की कि वे अपनी विशिष्ट पहचान (USP) स्थापित करें और युवा शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करें। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी तकनीकों के विकास पर जोर देना चाहिए जो विस्तार योग्य (Scalable), बाजार में बिकने योग्य (Marketable) और पेटेंट योग्य हों। साथ ही, प्रो. चंदेल ने शोध में पश्चिमी मान्यताओं और मॉडलों पर अत्यधिक निर्भरता छोड़कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल स्वदेशी समाधान खोजने पर भी बल दिया।