नौणी विवि के वैज्ञानिकों को फसलों की बीमारियों पर शोध के लिए मिले राष्ट्रीय पुरस्कार

Photo of author

By Hills Post

सोलन: हिमाचल प्रदेश के नौणी स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी काबलियत साबित की है। शिमला में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग ने पोस्टर और मौखिक प्रस्तुति में शीर्ष सम्मान हासिल किए हैं।

शिमला के आईसीएआर केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान सी.पी.आर.आई. में 22 और 23 अक्तूबर को जलवायु और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा एक अहम सम्मेलन हुआ था। इस कार्यक्रम में देशभर से आए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के बीच नौणी विश्वविद्यालय की टीम ने अपनी बेहतरीन रिसर्च पेश की। कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने इस कामयाबी पर विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल हांडा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के उच्च स्तरीय शोध से विश्वविद्यालय के अन्य विभागों को भी बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलेगी।

पुरस्कारों की बात करें तो डॉ. अमन चौहान ने पोस्टर प्रस्तुति में पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने चेरी और प्लम के पेड़ों में होने वाले संक्रमण की तुरंत पहचान करने वाली तकनीक पर शोध पेश किया। उनके साथ इस शोध में डॉ. अनिल हांडा, डॉ. भूपेश गुप्ता और डॉ. अजय ब्राक्टा भी शामिल थे। इस नई तकनीक की मदद से खेतों में ही एक घंटे के भीतर बीमारी का पता लगाया जा सकता है जिससे बागवानों को काफी फायदा होगा।

मौखिक प्रस्तुति में डॉ. शालिनी वर्मा, निकिता नेगी, डॉ. सतीश कुमार शर्मा, डॉ. गोपाल सिंह और अनन्या बेनल की टीम को दूसरा पुरस्कार मिला। इस टीम ने जापानी फल के पत्तों के झुलसा रोग के कारणों पर अपना अध्ययन पेश किया था। इसके साथ ही डॉ. मीनू गुप्ता, मुस्कान ठाकुर, डॉ. भूपेश गुप्ता और डॉ. अनुपमा सिंह की टीम को लहसुन में लगने वाले बैंगनी धब्बा रोग के शोध के लिए तीसरा पुरस्कार दिया गया। इन सभी वैज्ञानिकों के शोध से आने वाले समय में बागवानी और कृषि फसलों को गंभीर बीमारियों से बचाने में काफी मदद मिलेगी।

Photo of author

Hills Post

हम उन लोगों और विषयों के बारे में लिखने और आवाज़ बुलंद करने का प्रयास करते हैं जिन्हे मुख्यधारा के मीडिया में कम प्राथमिकता मिलती है ।