सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पुष्प विज्ञान एवं लैंडस्केपिंग विभाग द्वारा सोलन जिले की ग्राम पंचायत कोठो के अंतर्गत आने वाले गांव कुंडला में कट एवं पॉटेड फूल विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत आयोजित इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को पुष्प उत्पादन का व्यावहारिक ज्ञान देना तथा फसल विविधीकरण और आय सृजन में इसकी असीम संभावनाओं से अवगत कराना था। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में लगभग 65 स्थानीय किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. (कर्नल) संजय शांडिल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कृषि एवं बागवानी में विविधीकरण के नए अवसरों से किसानों को परिचित करवाने में इस तरह के प्रशिक्षण शिविरों और व्यावहारिक प्रदर्शनों के अत्यधिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम किसानों को आधुनिक तकनीकों और उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी कृषि गतिविधियों को अधिक लाभदायक बनाने में सहायक होते हैं। उन्होंने फूलों की विभिन्न स्वदेशी किस्मों के विकास के लिए विभाग के वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की और इन किस्मों को किसानों के बीच तेजी से अपनाने को बढ़ावा देने के लिए कृषकों के खेतों में विशेष प्रदर्शन इकाइयां स्थापित करने का अनूठा सुझाव दिया।
पुष्प विज्ञान एवं लैंडस्केपिंग विभाग के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों और शोधार्थियों प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एस. डिल्टा, डॉ. पूजा शर्मा, डॉ. मीनाक्षी बसोली, डॉ. प्रीति शर्मा, डॉ. अरुशी गर्ग तथा प्रियंका शर्मा ने किसानों को कट, लूज एवं पॉटेड फूलों के उत्पादन से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. बी.एस. डिल्टा ने पुष्प उत्पादन की वर्तमान स्थिति, बाजार की संभावनाओं और इससे जुड़े रोजगार के अवसरों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पुष्प अपनाकर किसान अपनी फसल प्रणाली में विविधता लाकर पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।
डॉ. पूजा शर्मा ने सिम्बिडियम ऑर्किड तथा अन्य प्रमुख कट फ्लावर फसलों की व्यावसायिक खेती पर एक विस्तृत व्याख्यान दिया। डॉ. मीनाक्षी बसोली ने गुलदाउदी की रोपाई से लेकर उसकी कटाई तक की संपूर्ण उत्पादन तकनीकों को समझाया और पॉटेड पौधों की व्यावसायिक संभावनाओं पर चर्चा की। डॉ. प्रीति शर्मा ने कार्नेशन फूलों के उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां किसानों के साथ साझा कीं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के पॉटेड पौधों, ग्रोइंग मीडिया और उनके उचित प्रबंधन के बारे में बताया गया। इसके अलावा घरों, संस्थानों तथा सार्वजनिक स्थलों की सुंदरता बढ़ाने के लिए फूलदार व सजावटी पौधों के उपयोग पर चर्चा हुई, साथ ही पर्यावरण को सुंदर बनाने और प्रदूषण को कम करने में पौधों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।
समापन सत्र के दौरान सभी किसानों को पौधे एवं उपयोगी तकनीकी साहित्य वितरित किया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा खेती से जुड़े विभिन्न जिज्ञासापूर्ण सवालों के संतोषजनक समाधान दिए और उन्हें किसी भी तकनीकी मार्गदर्शन के लिए नौणी विश्वविद्यालय आने हेतु प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर किसानों के लिए पुष्प उत्पादन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों और विभिन्न उत्पादों की एक आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई।
इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान पूनम शांडिल, कोठो ग्राम पंचायत के प्रधान सुषांत ठाकुर, उप-प्रधान अंकुर ठाकुर तथा पूर्व प्रधान कृष्ण लाल ठाकुर सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।