पशु मित्र भर्ती पर विभाग की सफाई, बीमार भेड़-बकरी उठाने के लिए फिटनेस जरूरी, अपमान नहीं

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By Hills Post

शिमला: हिमाचल प्रदेश में पशु मित्रों की भर्ती प्रक्रिया और उसमें करवाए जा रहे शारीरिक परीक्षण को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार पत्रों में चल रही बहसों पर पशुपालन विभाग ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। विभाग के प्रवक्ता ने गुरुवार को साफ किया कि भर्ती के दौरान वजन उठाने या अन्य शारीरिक परीक्षाएं किसी को अपमानित करने के लिए नहीं, बल्कि नौकरी की बुनियादी जरूरतों को परखने के लिए ली जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया 14 अगस्त 2025 को अधिसूचित ‘पशु मित्र नीति’ के तहत ही अमल में लाई जा रही है और इसे लेकर फैलाए जा रहे तथ्य भ्रामक हैं।

प्रवक्ता ने विस्तार से बताया कि यह शारीरिक परीक्षा कोई ताकत की नुमाइश या सहनशक्ति की दौड़ नहीं है। यह केवल एक सामान्य फंक्शनल फिटनेस टेस्ट है। इसका एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो भी व्यक्ति चुना जाए, वह पशु चिकित्सा संस्थानों या फार्मों में अपने कर्तव्यों को सुरक्षित तरीके से निभा सके। इस नौकरी में पशुओं को संभालना, बीमार भेड़ या बकरी (जिनका वजन लगभग 25 किलो होता है) को उठाना और चारे की बोरियां ढोना शामिल है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि उम्मीदवार शारीरिक रूप से इन कार्यों को करने में सक्षम है या नहीं, ताकि भविष्य में पशुओं या खुद कर्मचारी को कोई खतरा न हो।

महिलाओं के प्रति भेदभाव या अपमान के आरोपों को खारिज करते हुए विभाग ने कहा कि यह नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होता है। 5,000 रुपये प्रतिमाह के मानदेय वाली यह नौकरी प्रतिदिन चार घंटे की है। भले ही यह कार्य अंशकालिक है, लेकिन पशुपालन के क्षेत्र में शारीरिक श्रम अपरिहार्य है, इसलिए न्यूनतम शारीरिक क्षमता का होना अनिवार्य है। विभाग ने यह भी साफ किया कि वजन को सिर पर उठाना जरूरी नहीं है। अभ्यर्थी अपनी सुविधा के अनुसार वजन को कैसे भी उठा सकते हैं।

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह पूरी प्रक्रिया एसडीएम (सिविल) की अध्यक्षता वाली कमेटी की निगरानी में हो रही है और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी करवाई जा रही है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 315 अभ्यर्थी यह शारीरिक परीक्षा दे चुके हैं और किसी को भी चोट लगने की कोई खबर नहीं है। प्रवक्ता ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही आधी-अधूरी तस्वीरों या भ्रामक खबरों के बजाय आधिकारिक नीति पर भरोसा करें। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि अगर कहीं भी तय प्रक्रिया से हटकर कुछ होता पाया गया, तो उसकी जांच की जाएगी।

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