नाहन : पांवटा साहिब उपमंडल के नारीवाला शिव मंदिर परिसर में पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय स्थानीय निवासियों को पेड़ों के महत्व के प्रति जागरूक करना और प्रकृति की रक्षा के लिए सामूहिक एकजुटता प्रदर्शित करना था। इस दौरान ग्रामीणों ने न केवल पर्यावरण बचाने का संकल्प लिया, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को जोड़ते हुए पेड़ों को ‘रक्षा सूत्र’ भी बांधे। यह कदम इस क्षेत्र में बढ़ते शहरीकरण और निर्माण कार्यों के बीच प्रकृति को बचाने की एक सशक्त गूँज बनकर उभरा है।
इस मुहिम की पृष्ठभूमि में एक चिंताजनक घटना भी शामिल रही। कुछ शरारती तत्वों ने इन सूत्रों को जानबूझकर नष्ट कर दिया। इस कृत्य ने ग्रामीणों के मनोबल को गिराने के बजाय उन्हें और अधिक संगठित कर दिया। इसी के परिणामस्वरूप, ग्रामीण एक बार फिर मंदिर में एकत्रित हुए और पूरी निष्ठा के साथ पेड़ों को दोबारा रक्षा सूत्र बांधे। इस अवसर पर विशेष रूप से शस्त्र पूजन भी किया गया, जो इस बात का प्रतीक था कि ग्रामीण अपनी प्राकृतिक संपदा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

पर्यावरण संरक्षण की इस पुकार के पीछे मुख्य संघर्ष प्रस्तावित सड़क निर्माण को लेकर है। समाजसेवी नाथूराम के अनुसार, इस क्षेत्र में नई सड़क बनाने के लिए बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को काटे जाने की योजना है। ग्रामीणों का तर्क है कि गांव के लिए पहले से ही एक वैकल्पिक पक्का मार्ग मौजूद है, ऐसे में एक और सड़क के लिए पर्यावरण का बलिदान देना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि विकास के नाम पर हरियाली को नष्ट न किया जाए और कोई ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुँचे।
कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग देखने को मिला। समाजसेवी नाथूराम के साथ-साथ “मेरा गांव मेरा देश एक सहारा” संस्था की अध्यक्षा पुष्पा खंडूजा और सर्वोदय स्कूल के संस्थापक जगदीश चौधरी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर मौजूद रहे। ग्रामीणों ने दो-टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इन पेड़ों को काटा गया, तो इसके लिए सीधे तौर पर वन विभाग और पुलिस प्रशासन जिम्मेदार होगा। यह आंदोलन अब केवल एक गांव का मुद्दा न रहकर, विकास बनाम पर्यावरण की एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।