नाहन: स्कूल प्रवक्ता संघ जिला सिरमौर की आम सभा मंगलवार को डॉाइट (DIET) नाहन में आयोजित की गई, जिसमें सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों को सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध करने के निर्णय और उससे जुड़ी नीतियों पर गहरा मंथन किया गया। संघ ने प्रदेश सरकार के स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड में बदलने के फैसले का तो स्वागत किया, लेकिन इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए नियमित प्रवक्ताओं की दोबारा परीक्षा लेने और उनके लिए अलग कैडर बनाने के प्रस्ताव को पूरी तरह अव्यवहारिक और अनुचित करार दिया। संघ के राज्य चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर और जिला अध्यक्ष डॉ. आई.डी. राही ने कड़े शब्दों में कहा कि जो शिक्षक लोक सेवा आयोग और चयन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं से चयनित होकर आए हैं और जिन्हें 15 से 25 वर्षों का अनुभव है, उनकी दोबारा परीक्षा लेना उनकी दक्षता और गरिमा का मजाक उड़ाने जैसा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ विभाग आउटसोर्स और अस्थायी शिक्षकों को बिना परीक्षा जारी रखने की बात कर रहा है, वहीं नियमित शिक्षकों के लिए शर्तें थोपी जा रही हैं, जो न्यायसंगत नहीं है। संघ ने सरकार को सुझाव दिया कि अलग कैडर बनाने के बजाय स्वैच्छिक आधार पर शिक्षकों से विकल्प लिए जाएं।
उन्होंने मांग की कि सीबीएसई और हिमाचल बोर्ड के सभी स्कूलों में उप-प्रधानाचार्य (Vice Principal) के पद सृजित किए जाएं और उन्हें स्कूल की वरिष्ठता के बजाय संयुक्त वरिष्ठता के आधार पर भरा जाए। साथ ही, स्थानांतरण नीति में बदलाव न करते हुए शिक्षकों का न्यूनतम कार्यकाल 3 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष रखा जाए, ताकि दूरदराज के शिक्षकों को भी इन स्कूलों में सेवा का मौका मिल सके। संघ ने सीबीएसई स्कूलों के लिए की जा रही आउटसोर्स भर्ती का भी पुरजोर विरोध किया और इसे शिक्षकों के बीच खाई पैदा करने वाला कदम बताया। बैठक के अंत में संघ ने लंबित वेतनमान एरियर और डीए की किस्त जारी करने की मांग करते हुए उच्च शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपा।