शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और राज्य को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य (Green Energy State) बनाने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बनडाईऑक्साइड एमीशनसः पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश’ नामक एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की। इसके साथ ही, राज्य में औषधीय पौधों की खेती, किसानों की आजीविका और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो अहम समझौते भी हस्ताक्षरित किए गए हैं।

डाबर इंडिया के साथ 1.20 करोड़ पौधों का करार
पहले समझौते के तहत डाबर इंडिया लिमिटेड अगले 10 वर्षों में प्रदेश के किसानों को उनकी भौगोलिक और पारिस्थितिकीय अनुकूलता के अनुसार कुल 1.20 करोड़ गुणवत्तापूर्ण पौधे (प्रतिवर्ष 12 लाख) उपलब्ध करवाएगी। इस योजना के अंतर्गत निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्रों, जिनमें ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर और निचला शिमला शामिल हैं, में आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर के पौधे बांटे जाएंगे। वहीं, मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्रों जैसे कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर के लिए जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला, पदम काष्ठ और पुष्करमूल का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के अधिक ऊंचाई वाले अल्पाइन क्षेत्रों के किसानों को अतीस और विष जैसी बहुमूल्य जड़ी-बूटियां उपलब्ध करवाई जाएंगी।
सोलन में 225 महिला किसानों को सशक्त करेगा दूसरा समझौता
दूसरा समझौता सोलन के मैसर्स करण सिंह वैद्य के साथ पांच वर्षों के लिए हस्ताक्षरित हुआ है, जिसके तहत सोलन जिले और आसपास की पंचायतों में औषधीय खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए प्रारंभिक चरण में 108 बीघा से अधिक भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। इस विशेष समझौते के तहत मुख्य रूप से छह प्राथमिकता वाली प्रजातियों की खेती की जाएगी, जिनमें हल्दी, अश्वगंधा, शतावरी, तुलसी, चिरायता और हिमालयन जेंटियन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
ग्रीन एनर्जी और ई-मोबिलिटी पर सरकार का विजन
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के पर्यावरण-अनुकूल लक्ष्यों पर भी विस्तार से चर्चा की। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 200 मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत युवाओं को अपनी सौर परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सरकार विशेष सब्सिडी दे रही है। नालागढ़ में ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से 1 मेगावाट का अत्याधुनिक ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में अहम कदम उठाते हुए आगामी अप्रैल माह तक एचआरटीसी के बेड़े में 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। इसके अलावा, प्रदेश की 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में बदलने के लिए सरकार की ओर से 40 प्रतिशत की भारी सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
जलवायु परिवर्तन की चेतावनी और राज्य के अधिकार
मुख्यमंत्री ने अप्रत्याशित बादल फटने, अचानक बाढ़ और ग्लेशियरों के सिकुड़ने जैसी घटनाओं को प्रकृति की गंभीर चेतावनी बताया। वर्ष 2023 की भीषण प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने पर जोर दिया, जिस आपदा में 23,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए थे।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने राज्य के वैधानिक अधिकारों को लेकर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब तक पड़ोसी राज्य ‘भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड’ (BBMB) के लंबित बकाये के निपटारे का ठोस और स्पष्ट आश्वासन नहीं देते, तब तक हिमाचल प्रदेश किशाऊ और रेणुका बांध जैसी आगामी जलविद्युत परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ेगा।