मध्य प्रदेश के मड़ई उत्सव में गिरिपार के सिंहटू और डगैली नृत्य ने दर्शकों को मोहा

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By Hills Post

सोलन: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला की समृद्ध लोक संस्कृति की गूंज मध्य प्रदेश तक सुनाई दी है। सिरमौर के गिरिपार स्थित हाटी जनजातीय क्षेत्र की प्रतिष्ठित आसरा संस्था के कलाकारों ने मध्य प्रदेश के मंडला जिले के बिछिया में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय मड़ई उत्सव में अपनी दमदार प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। 9 से 11 जनवरी तक चले इस उत्सव में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार एवं आसरा संस्था के प्रभारी डॉ. जोगेंद्र हाब्बी के नेतृत्व में कलाकारों ने गिरिपार के पारंपरिक ‘सिंहटू नृत्य’ और ‘डगैली नाच’ का ऐसा समा बांधा कि वहां मौजूद जनसमूह झूमने पर मजबूर हो गया।

मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय और मंडला जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस उत्सव का उद्देश्य भारत की विभिन्न जनजातीय नृत्य शैलियों को एक मंच प्रदान करना था। पद्मश्री विद्यानंद सरैक और डॉ. जोगेंद्र हाब्बी के कुशल निर्देशन में तैयार इन नृत्य प्रस्तुतियों को लोक कलाकारों ने अत्यंत आकर्षक और प्रभावशाली अंदाज में पेश किया। गिरिपार की इस अनोखी सांस्कृतिक विरासत को देखकर मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आए दर्शकों में हाटी क्षेत्र की संस्कृति के प्रति विशेष जिज्ञासा और आकर्षण देखने को मिला। विशेष रूप से उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित गोपाल हाब्बी द्वारा तैयार किए गए मुखौटे और पारंपरिक परिधान इस प्रस्तुति के मुख्य आकर्षण रहे।

सांस्कृतिक महत्व की दृष्टि से ‘डगैली नाच’ कृष्ण जन्माष्टमी के बाद आने वाली त्रयोदशी और चतुर्दशी की रात्रियों में किया जाता है, जबकि ‘सिंहटू नृत्य’ सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के लेऊनाना और कुप्फर मटलोड़ी गांवों में दिवाली और एकादशी के अवसर पर पारंपरिक रूप से किया जाता है।

मड़ई उत्सव में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, असम और तेलंगाना जैसे राज्यों के लोक नृत्यों की प्रस्तुति के बीच हिमाचल के इन नृत्यों ने अपनी एक अलग पहचान बनाई। इस सफल प्रस्तुति में सुप्रसिद्ध लोक गायक रामलाल वर्मा, गोपाल हाब्बी, बिमला चौहान, शहनाई व बांसुरी वादक बलदेव, ढोलक वादक संदीप, करनाल वादक रविदत्त सहित चमन, मनमोहन, अमीचंद, सुनील, सरोज, अनु, आरती और प्रिया जैसे कलाकारों ने अहम भूमिका निभाई।

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