सोलन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में जिला सोलन के कोठों स्थित भाषा एवं संस्कृति सभागार में रविवार को एक विशाल जन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। अपने ओजस्वी संबोधन में उन्होंने संघ की 100 वर्षों की यात्रा और सामाजिक परिवर्तन के लिए निर्धारित ‘पंच प्रणों’ (पांच परिवर्तनों) पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. गोपाल ने कहा कि 1800 ईस्वी से पूर्व विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान 34% था और हम ज्ञान-विज्ञान में अग्रणी थे, लेकिन समाज में एकजुटता की कमी के कारण हमें पराधीनता झेलनी पड़ी। इसी कमी को दूर करने और हिंदू समाज को संगठित करने के लिए डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग हिंदुत्व को संकीर्ण मानते हैं, वे पश्चिमी विचारों से प्रभावित हैं; वास्तव में हिंदुत्व कोई रिलिजन नहीं, बल्कि एक विशाल जीवन पद्धति है जो विविधता में सबको फलने-फूलने की आजादी देती है।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने संघ के शताब्दी वर्ष के लिए समाज के सामने पांच प्रमुख लक्ष्य रखे, जिन्हें पंच परिवर्तन कहा गया है। इनमें पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्यों की रक्षा), सामाजिक समरसता, ‘स्व’ का बोध और नागरिक अनुशासन शामिल हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्ध वर्ग से इन विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में एक जिज्ञासा समाधान सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें नशा, रोजगार और मतांतरण जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा हुई। हाल ही में यूजीसी (UGC) कानून और भेदभाव को लेकर छिड़ी बहस पर पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ समाज में किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ है और सभी को समान सम्मान देने का पक्षधर है।
इस संगोष्ठी में सोलन के 500 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने भाग लिया, जिनमें सीए, वकील, डॉक्टर, प्राचार्य और शोधकर्ता शामिल थे। कार्यक्रम में मातृशक्ति की भी अच्छी भागीदारी रही और लगभग 160 महिलाएं उपस्थित थीं। इस अवसर पर पद्मश्री विद्यानंद सरैक, नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल, प्रांत प्रचारक संजय जी, विभाग संघचालक चंद्रशेखर जी और जिला संघचालक गुरदीप साहनी सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।