शिमला ED ने ओडिशा में मारा छापा, करोड़ों की लग्जरी कारें और गहने जब्त

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By Hills Post

शिमला: हिमाचल प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में से एक, लगभग 1396 करोड़ रुपये के इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड (ITCOL) बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की शिमला टीम ने इस घोटाले के तार ओडिशा तक जोड़ते हुए राजधानी भुवनेश्वर में दो ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें अकूत संपत्ति का खुलासा हुआ है।

ईडी ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत कारोबारी शक्तिरंजन दास के आवास और उनकी कंपनियों, एम/एस अनमोल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड (AMPL) और एम/एस अनमोल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड (ARPL) के दफ्तरों पर की।

छापेमारी में क्या मिला?

शनिवार को हुई इस तलाशी में ईडी को 7 करोड़ रुपये मूल्य की 10 लग्जरी गाड़ियां और 3 सुपरबाइक्स का जखीरा मिला। जब्त किए गए वाहनों में पोर्शे केयेन, मर्सिडीज बेंज जीएलसी, बीएमडब्ल्यू-एक्स7, ऑडी ए3, और मिनी कूपर जैसी विश्व प्रसिद्ध ब्रांड की कारें शामिल हैं। इसके अलावा होंडा गोल्ड विंग जैसी कीमती सुपरबाइक भी सीज की गई है।

यही नहीं, ईडी ने 13 लाख रुपये नकद, लगभग 1.12 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और शक्तिरंजन दास से जुड़ी कई अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद किए हैं। साथ ही, उनके नाम पर चल रहे दो बैंक लॉकरों को भी तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

ईडी की जांच हिमाचल प्रदेश पुलिस की सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। आरोप है कि ITCOL के निदेशकों ने 2009 से 2013 के बीच बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के संघ से भारी-भरकम लोन लिया। लेकिन इस राशि को फर्जी प्रोजेक्ट रिपोर्ट और शेल (दिखावटी) कंपनियों के जरिए हड़प लिया गया।

अब तक की जांच में यह सामने आया है कि ITCOL और उसकी शेल कंपनियों ने लगभग 59.80 करोड़ रुपये ओडिशा स्थित अनमोल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड के खातों में ट्रांसफर किए थे। ईडी का मानना है कि कंपनी के प्रबंध निदेशक शक्तिरंजन दास ने ITCOL के मुख्य प्रमोटर राकेश कुमार शर्मा की मदद करते हुए इस अवैध धन को अपने खनन कारोबार में निवेश किया और इसे वैध दर्शाने का प्रयास किया।

इससे पहले भी ईडी इस मामले में 310 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर चुकी है, जिसमें से 289 करोड़ रुपये की संपत्ति अप्रैल 2025 में बैंकों को वापस कर दी गई थी। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और इस घोटाले से जुड़ी कई और परतें खुल सकती हैं।

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