नाहन : हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के शिलाई विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान रविवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। पश्मी स्थित चालदा महासू महाराज के मंदिर में शीश नवाकर वापस लौट रहे उपमुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक एवं उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के काफिले को 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारियों ने बीच रास्ते में रोक लिया। कर्मचारियों ने उपमुख्यमंत्री को घेरकर अपनी मांगों और वर्तमान संचालक कंपनी द्वारा किए जा रहे कथित शोषण के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा।
मुलाकात के दौरान कर्मचारियों ने उपमुख्यमंत्री को बताया कि वे साल 2010 से प्रदेश में आपातकालीन सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वर्तमान संचालक कंपनी श्रम कानूनों और अदालत के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ा रही है। कर्मियों का आरोप है कि माननीय उच्च न्यायालय और शिमला मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन (लगभग ₹20,297) के बजाय उन्हें मात्र ₹11,000 से ₹12,000 दिए जा रहे हैं। साथ ही, उनसे 8 घंटे की जगह 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है, जो उनके साथ सीधे तौर पर अन्याय है।

ज्ञापन के माध्यम से यह भी मुद्दा उठाया गया कि कर्मचारियों को सैलरी स्लिप, वर्दी, पहचान पत्र और अन्य वैधानिक अवकाश जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। कर्मचारियों ने शिकायत की कि यदि कोई कर्मचारी अपने हक के लिए आवाज उठाता है, तो कंपनी प्रबंधन उसे नौकरी से निकालने या दूरदराज के क्षेत्रों में तबादला करने की धमकी देता है। इसके अलावा, भविष्य निधि (PF) और इंश्योरेंस के नाम पर भी भारी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
इस मुलाकात के बाद कर्मचारियों के चेहरे पर एक उम्मीद की किरण दिखी है। मौके पर मौजूद एम्बुलेंस कर्मियों ने बताया कि उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने उनकी शिकायतों को बहुत ध्यान से सुना। कर्मियों ने कहा, “आज हम सभी लोग उपमुख्यमंत्री जी से मिले और उन्होंने हमें सकारात्मक आश्वासन दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि सरकार बहुत जल्द हमारी मांगों पर विस्तार से चर्चा करेगी और इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।”
कर्मचारियों का कहना है कि वे प्रदेश की जनता की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं, लेकिन उनके कानूनी अधिकारों की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि कब तक इन हजारों कर्मियों को उनके हक का वेतन और सुरक्षित कार्य वातावरण मिल पाता है।