शूलिनी यूनिवर्सिटी ने अपना 18वां स्थापना दिवस मनाया

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By Hills Post

सोलन: शूलिनी यूनिवर्सिटी ने शुक्रवार को अपना 18वां स्थापना दिवस बेहद खास अंदाज़ में मनाया। इस बार की थीम शूलिनी 2.0 रखी गई, जिसके ज़रिए यूनिवर्सिटी को भविष्य में दुनिया के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में स्थापित करने की एक बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना पेश की गई। इस कार्यक्रम में हिमाचल के एक छोटे से कस्बे से शुरू होकर ग्लोबल रैंकिंग तक पहुंचने के शानदार सफर को याद किया गया। इसके साथ ही बेहतर रिसर्च, नए इनोवेशन और समाज सेवा पर पहले से भी ज़्यादा ध्यान केंद्रित करने का संकल्प लिया गया।

कसौली के विधायक और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विनोद सुल्तानपुरी ने इस मौके पर कैंपस में कई नई सुविधाओं की शुरुआत की। इनमें बायोटेक गैलरी, फूड एंड न्यूट्रिशन लैब, नया ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग कॉम्प्लेक्स और कई हॉस्टल शामिल हैं। कैंपस को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए एक सोलर विंड हाइब्रिड पावर प्लांट और ऑर्गेनिक वेस्ट कंपोस्टर का भी उद्घाटन किया गया। साथ ही नए स्कूल ऑफ साइकोलॉजी की भी शुरुआत हुई। छात्रों को संबोधित करते हुए विधायक सुल्तानपुरी ने तार्किक सोच और एक सकारात्मक माहौल पर जोर दिया। उनका कहना था कि शिक्षण संस्थानों में रचनात्मकता और नए विचारों को आजमाने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए।

यूनिवर्सिटी के विकास के अगले चरण शूलिनी 2.0 का ज़िक्र करते हुए प्रो चांसलर प्रो. विशाल आनंद ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद शूलिनी ने एक बेहतरीन रिसर्च कल्चर तैयार किया है। उन्होंने दुनिया के टॉप 100 विश्वविद्यालयों में शामिल होने का लक्ष्य रखा और भविष्य में ओलंपिक स्तर के मल्टी स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स, ऑडिटोरियम और म्यूज़ियम हब बनाने की योजनाएं भी साझा कीं। वहीं कुलपति प्रो. अतुल खोसला ने कहा कि शूलिनी का लक्ष्य दुनिया के सबसे खुशहाल और सुंदर विश्वविद्यालयों में से एक बनना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक बेहतरीन यूनिवर्सिटी की पहचान सिर्फ बड़ी इमारतों से नहीं बल्कि उसके शोध की गुणवत्ता और समाज की भलाई में उसके योगदान से होती है।

इस खास आयोजन में एक प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें दिखाया गया कि यूनिवर्सिटी की रिसर्च रोज़मर्रा की समस्याओं को कैसे सुलझा रही है। इसमें सौर ऊर्जा से चलने वाली ‘फोटोवोल्टिक इलेक्ट्रिक हर्बेरियम मशीन’ पेश की गई जो पौधों के नमूनों को पारंपरिक तरीकों के मुकाबले बेहद तेज़ी से सुखाती है। इसके अलावा बैक्टीरिया की ग्रोथ को ट्रैक करने वाला ‘साइटोऑरा’ सिस्टम, कमरों के अंदर की हवा को प्राकृतिक तौर पर साफ करने वाला ‘ग्रीन एल्गल एयर प्यूरीफायर’ और इथेनॉल उत्पादन की रफ्तार कई गुना बढ़ाने वाला एक खास इलेक्ट्रो-फर्मेंटेशन प्रोटोटाइप भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।

पानी के सही इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बायोचार पर आधारित एक वर्टिकल कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड का भी प्रदर्शन किया गया। यह प्रोजेक्ट मौजूदा समय में सुल्तानपुर गांव में घरों के गंदे पानी को साफ कर खेती और बाकी कामों के लिए दोबारा इस्तेमाल के लायक बना रहा है। इसके अलावा स्कूल ऑफ बायोइंजीनियरिंग एंड फूड टेक्नोलॉजी ने हिमालयी क्षेत्रों में मिलने वाले संसाधनों से बने कई उत्पाद पेश किए। इनमें रोडोडेंड्रोन की चटनी, कचनार और लहसुन का अचार, प्लम कैंडी और फलों सब्जियों से बनी वाइन जैसे कई बेहतरीन उत्पाद शामिल थे।

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