सोलन: शूलिनी विश्वविद्यालय के अनुप्रयुक्त विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा ‘रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) और जैव प्रौद्योगिकी’ पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इस वैश्विक मंच पर भारत और विदेश के दिग्गज वैज्ञानिक, नीति निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ 21वीं सदी की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ते प्रतिरोध से निपटने के लिए एकजुट हुए हैं।

उद्घाटन सत्र में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में चेतावनी दी कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और उद्योगों के बीच मजबूत सहयोग और अंतःविषयक अनुसंधान (Interdisciplinary Research) की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
यूनाइटेड किंगडम की साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मायरोन क्रिस्टोडौलाइड्स ने विशेष अंतर्राष्ट्रीय अतिथि के रूप में अपना मुख्य भाषण दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिरोधी रोगजनकों (Pathogens) के खिलाफ प्रभावी समाधान विकसित करने के लिए अनुवांशिक अनुसंधान और उन्नत जैव प्रौद्योगिकी उपकरण अनिवार्य हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में उभर रहे वैश्विक अनुसंधान अवसरों और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक साझेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया।
सम्मेलन के पहले दिन कई महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें AMR निगरानी, महामारी विज्ञान और बायोटेक-आधारित निदान पर गहन विमर्श हुआ। प्रमुख वैज्ञानिकों और चिकित्सकों ने अपने विशेषज्ञ व्याख्यानों के माध्यम से नवीनतम शोध और वैश्विक निगरानी प्रणालियों में हुए विकास की जानकारी साझा की।
दिन भर चले बौद्धिक विमर्श के बाद शाम का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नेटवर्किंग गतिविधियों के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों ने हिस्सा लिया, जिनका सामूहिक लक्ष्य सामूहिक प्रयासों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।