सोलन: शूलिनी विश्वविद्यालय परिसर में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) के सहयोग से एआईयू अन्वेषण 2025-26 अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय छात्र अनुसंधान सम्मेलन में देश भर के विभिन्न संस्थानों से लगभग 200 छात्रों और संकाय सदस्यों ने हिस्सा लिया। इन युवा प्रतिभाओं ने अपने मौलिक अनुसंधान मॉडल, प्रोटोटाइप और नवोन्मेषी विचारों का शानदार प्रदर्शन कर इस आयोजन को बौद्धिक आदान-प्रदान और अकादमिक सहयोग का एक जीवंत मंच बना दिया। एआईयू की इस प्रमुख पहल का मुख्य उद्देश्य युवा विद्वानों में वैज्ञानिक सोच, समस्या-समाधान कौशल और एक सशक्त अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देना है।

2047 तक भारत को वैश्विक नेता बनाने में युवाओं की भूमिका
सम्मेलन के दौरान शूलिनी विश्वविद्यालय की मुख्य शिक्षण अधिकारी डॉ. आशू खोसला ने अपने स्वागत भाषण में शोध आधारित शिक्षा और नवाचार उन्मुख प्रणालियों के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को निखारने पर विशेष बल दिया। एआईयू के संयुक्त निदेशक डॉ. अमरिंदर पाणि ने अन्वेषण को देश के सबसे बड़े शोध सम्मेलनों में से एक बताते हुए कहा कि 2047 तक भारत को एक सशक्त वैश्विक नेता बनाने में शोध और नवाचार ही सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति होंगे। उन्होंने देश की 75 प्रतिशत युवा आबादी की अपार क्षमता का जिक्र करते हुए छात्रों को राष्ट्र निर्माण और विकास की दिशा में अपने शोध प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसी कड़ी में विश्वविद्यालय के नवाचार एवं विपणन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर आशीष खोसला ने अकादमिक मंचों में युवाओं की भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मोहम्मद हिदायतुल्लाह के विचारों का संदर्भ देते हुए कहा कि अनुसंधान की सच्ची भावना सार्थक प्रश्न पूछने और साहस के साथ नवाचार करने में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक प्रगति स्वाभाविक रूप से सहयोगात्मक है, जिसके लिए एक साझा बौद्धिक उद्देश्य की नितांत आवश्यकता होती है।
भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत और भविष्य की तकनीक
भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) के अध्यक्ष प्रोफेसर विनय पाठक ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय विद्वानों, ऋषियों और श्रीनिवास रामानुजन जैसे महान गणितज्ञों द्वारा संवर्धित भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत का गहराई से उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले भविष्य का स्वरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और क्वांटम प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते अंतःविषयक अनुसंधानों द्वारा ही तय होगा।
कार्यक्रम के दौरान शूलिनी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पी. के. खोसला ने भी युवा शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने छात्रों को सीमाओं से परे सोचने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर भारत को वैश्विक अनुसंधान मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने के लिए प्रेरित किया। समारोह का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रबंधन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर चंदर मोहन गुप्ता द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हर बड़े नवाचार की शुरुआत एक छोटे विचार से होती है और उसे सार्थक परिणाम में बदलने के लिए एक व्यवस्थित अवधारणा की आवश्यकता होती है।