सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण छोटे कर्मचारियों का अस्तित्व खतरे में: विनोद

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By Hills Post

नाहन: सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण छोटे कर्मचारियों का अस्तित्व खतरे में पडता नजर आ रहा है तथा इसमें राज्य की सरकारें भी इन नीतियों की पक्षधर लग रही हैं। यह बात हिमाचल प्रदेश कर्मचारी परिसंघ के प्रदेशाध्यक्ष विनोद कुमार ने नाहन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।

प्रदेशाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि हर जिले में कर्मचारियों को आ रही दिक्कतों तथा उनकी मांगों के बारे में चर्चा की जा रही है तथा प्रदेश सरकार से इनकी समस्याओं के बारे में अवगत करवाया जा रहा है। श्री कुमार ने बताया कि अभी तक वह कांगडा व सोलन में कर्मचारियों से मिलकर उनकी समस्याओं व उनकी मांगों के बारे में विचार विमर्श कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि छोटे कर्मचारियों के आर्थिक मामलों को लटकाया जा रहा है जबकि अफसरशाही को सुख-सुविधाओं में सरकारें आए दिन बढोतरी कर रही हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि संशोधित वेतनमानों के आधार पर 1-1-2006 से जो कर्मचारियों का एरियर का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है तथा सरकार उनको एक मुश्त किस्त जारी करे तथा 1-1-2010 से डीए की 8 प्रतिशत किस्त जो पैडिंग है उसका भी अभिलंब भुगतान जारी करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का कर्मचारी इस बात से भली-भांति परिचित है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा ठीक नहीं है और केंद्र के 13वें वित्त आयोग से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली आर्थिक ग्रांट में भारी कटोती करके हिमाचल की मुश्किलों को ओर बढाया है, परंतु इन सब बातों को देखते हुए भी कर्मचारियों की जायज मांगे रोकी नहीं जाती तथा सरकार को चाहिए कि वह फजूल खर्चों को रोके।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि सरकार को अफसरशाही के काफिले पर हर माह लगभग 1 करोड रूपए की राशि व्यय होती है, जिसमें 40 प्रतिशत राशि का दुरूपयोग हो रहा है जिसको प्रदेश सरकार रोके और अफसरशाही की जवाबदेही ऐसे मामलों में सीधे निर्धारित हो। उन्होंने कहा कि परिसंघ धूमल सरकार की इस बात के लिए प्रशंसा करता है कि पिछले दो सालों में सरकार ने सरकारी क्षेत्र में नौकरी के दरवाजे खोले हैं तथा अधिनस्थ सेवा चयन बोर्ड और पब्लिक सर्विस कमीशन के माध्यम से प्रदेश में हजारों नियुक्तियां हुई हैं जो एक बहुत बडी उपलब्धि है। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी परिसंघ प्रदेश की माली हालत के मद्देनजर देश के प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री व केंद्र योजना आयोग के उपाध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर मांग की है कि वेतन आयोग के कारण प्रदेश के खजाने पर पड रहे अतिरिक्त बोझ के लिए 800 करोड रूपए हिमाचल को दिए जाएं व इस संबंध में परिसंघ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय इस्पात मंत्री से आग्रह किया कि इस मामले में हिमाचल की मदद करे। उन्होंने कहा कि धूमल सरकार द्वारा चलाई गई ई-ग्रेवनेंस प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इसके साथ-साथ जरूरी है कि सरकारी कार्यप्रणाली के अंदर अकुशलता, फजूल खर्चों, भ्रष्टाचार व अन्याय, इन बिंदुओं पर सरकार सख्त कदम उठाए। पत्रकार वार्ता में जिला सिरमौर कर्मचारी परिसंघ के अध्यक्ष जसविंद्र सैनी, महासचिव निर्भय कंवर व सोलन जिला के महासचिव प्रेमपाल आदि मौजूद थे।

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