शिमला: हिमाचल प्रदेश के आर्थिक हितों को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक शुक्रवार को सियासी अखाड़े में तब्दील हो गई। मुद्दा था 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को बंद करने का प्रस्ताव, जिससे प्रदेश को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संकट पर चर्चा के लिए सभी दलों को एक मंच पर बुलाया था, लेकिन विपक्षी दल भाजपा ने बीच में ही बैठक का बहिष्कार (वॉकआउट) कर दिया।

भाजपा के वॉकआउट पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने कड़ा ऐतराज जताया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब बात प्रदेश के हकों की हो, तो राजनीति छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे दिल्ली के दबाव में हैं और उनके पास केंद्र के फैसले के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत नहीं है। सीएम ने कहा कि भाजपा नेता बैठक में आए तो सही, लेकिन जनता के दबाव में, और मौका मिलते ही भाग खड़े हुए।
मुख्यमंत्री ने पूर्व और वर्तमान सरकार को मिली मदद का तुलनात्मक ब्यौरा भी रखा। उन्होंने बताया कि भाजपा के कार्यकाल के दौरान केंद्र से 54,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान और 16,000 करोड़ रुपये जी.एस.टी. मुआवजे के तौर पर मिले। जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार को अब तक सिर्फ 17,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिला है।
CM ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत यह अनुदान राज्यों का हक है जो 1952 से मिल रहा है। इसे बंद करना हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के साथ अन्याय है।
भले ही मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने किनारा कर लिया हो, लेकिन अन्य दलों ने सरकार का साथ दिया है। सीपीआई (एम), आम आदमी पार्टी (AAP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने एक सुर में कहा कि वे हिमाचल के हितों के लिए प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार हैं।
पूर्व विधायक राकेश सिंघा (CPM) ने कहा कि सभी दलों को एकजुट होकर सहमति बनानी चाहिए। डॉ. राजेश चानना (AAP) ने कहा कि राज्य के संसाधन सीमित हैं, ऐसे में केंद्र की मदद जरूरी है। बसपा प्रतिनिधि ने याद दिलाया कि कोविड और आपदाओं के बाद राज्य की आर्थिक कमर टूट चुकी है।
मुख्यमंत्री ने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि जब 2023 की आपदा के समय विशेष राहत पैकेज का प्रस्ताव लाया गया था, तब भी भाजपा ने वॉकआउट किया था। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और प्रदेश विरोधी रवैये के लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेगी। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और कांग्रेस प्रवक्ता कुलदीप राठौर ने भी भाजपा के इस कदम की निंदा की है।