सिरमौर के वीर शहीद प्रवीण शर्मा को मरणोपरांत ‘Mention-in-Despatches’ सम्मान

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By पंकज जयसवाल

नाहन : आज जब पूरा देश 77वें गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा है और दिल्ली के ‘कर्तव्य पथ’ पर भारतीय सेना अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रही है, तब हर देशवासी का सिर उन बलिदानियों के सम्मान में झुकना चाहिए जिनके कारण यह गणतंत्र सुरक्षित है। आज के इस पावन अवसर पर हम याद कर रहे हैं हिमाचल की माटी के उस लाल को, जिसने तिरंगे की आन के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया—लांस नायक प्रवीण शर्मा (1 पैरा SF)।

आज क्यों याद कर रहे हैं हम प्रवीण को?
अक्सर लोग पूछते हैं कि उत्सव के माहौल में शहादत की बात क्यों? इसका उत्तर आज की सेना की गौरवशाली सूची में छिपा है। अभी चंद दिन पहले ही 15 जनवरी (सेना दिवस) पर भारतीय सेना ने प्रवीण शर्मा को मरणोपरांत ‘Mention-in-Despatches’ सम्मान से नवाजा है। आज 26 जनवरी को जब हम एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी ताकत देख रहे हैं, तो यह याद रखना आवश्यक है कि यह ताकत प्रवीण जैसे ‘पैरा कमांडो’ के लहू से सींची गई है।

अनंतनाग की वो मुठभेड़ और अदम्य साहस
अगस्त 2024 में अनंतनाग के घने जंगलों में जब आतंकी लोकतंत्र को चुनौती दे रहे थे, तब 1 पैरा (स्पेशल फोर्सेस) के जांबाज प्रवीण शर्मा ने मौत को सामने देखकर भी कदम पीछे नहीं हटाए। एक घातक ऑपरेशन के दौरान, उन्होंने अपनी टीम को बचाने के लिए खुद को खतरे में डाला और आतंकियों की गोलीबारी का डटकर सामना किया। उनका यह सर्वोच्च बलिदान ही था कि ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन देश ने अपना एक अनमोल हीरा खो दिया।

सम्मान जो हमेशा अमर रहेगा
सेना द्वारा दिया गया ‘Mention-in-Despatches’ कोई साधारण पदक नहीं है। यह इस बात की गवाही है कि प्रवीण की बहादुरी इतनी असाधारण थी कि सेना प्रमुख ने खुद उनके नाम का उल्लेख अपनी रिपोर्ट में किया। आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर, उनकी वर्दी पर सजने वाली वह ‘कांस्य की पत्ती’ (Bronze Lotus Leaf) उनके परिवार और पूरे हिमाचल के लिए स्वाभिमान का प्रतीक बन गई है।

इकलौते बेटे का ऋण, राष्ट्र का नमन
माता रेखा शर्मा और पिता राजेश शर्मा का वह इकलौता बेटा, जिसकी शादी की शहनाइयां गूंजने वाली थीं, तब देश की यादों में अमर हो गया है। आज गणतंत्र दिवस पर जब हम राष्ट्रगान गाते हैं, तो उसकी हर धुन में प्रवीण जैसे वीरों की सांसें बसी हैं।

आज का यह विशेष लेख उन तमाम शहीदों के नाम है, जिनकी बदौलत हम आज आज़ाद आबोहवा में गणतंत्र का पर्व मना रहे हैं। लांस नायक प्रवीण शर्मा का बलिदान हमें याद दिलाता रहेगा कि गणतंत्र सिर्फ किताबों से नहीं, वीर जवानों के संकल्प से चलता है।

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पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।